Monday, April 12, 2010

कांग्रेस पर साधा सांसद अजित ने निशाना


(sansadji.com)

राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष एवं बागपत (उ.प्र.) से पार्टी सांसद चौधरी अजित सिंह उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर तमाम संभावनाएं एक साथ टटोल रहे हैं। उन्हीं में एक है, उत्तर प्रदेश से खाली हो रही दस राज्यसभा सीटों के बहाने कांग्रेस से गुफ्तगू। लेकिन ताजा बयान मीडिया से साझा करने के अर्थ निकाले जा रहे हैं कि अभी बात बनी नहीं है।

रालोद सुप्रीमो एवं सांसद चौधरी अजित सिंह ने गाजियाबाद में इस बात से इनकार किया कि केंद्र में मंत्री पद के बदले उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र में मंत्री पद के लिए कांग्रेस के साथ कोई समझौता नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि जुलाई में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटें खाली हो रही हैं। इन 10 में सात पर सपा काबिज है, जबकि दो पर बसपा और एक भाजपा के कब्जे में है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के 20 सदस्य हैं और रालोद के 10 विधायकों की मदद से उसे एक सीट मिलने की संभावना बढ़ सकती है। चौधरी अजित सिंह की टिप्पणी उन खबरों के बीच आई है जिनमें कहा गया है कि कांग्रेस अपने मौजूदा राज्यसभा सदस्य कैप्टन सतीश शर्मा के पुनर्निर्वाचन के लिए रालोद से बातचीत कर रही है। श्री शर्मा को गांधी परिवार का करीबी माना जाता है। खबरों में यह भी कहा गया है कि चौधरी अजित सिंह के संप्रग में शामिल होने की स्थिति में उन्हें ‘उचित पारितोषिक’ का वादा किया गया है। लोकसभा में रालोद विपक्ष में है और उसके पांच सदस्य हैं। चौधरी अजित सिंह राज्यसभा सीटों के मुतल्लिक कांग्रेस का समर्थन करें, न करें, इस सूचना से ये राजनीति तो ध्वनित हो ही जाती है कि कांग्रेस में शामिल होने को लेकर उनकी पार्टी से कोई गहरी गुफ्तगू चल रही है। राज्यसभा संबंधी बयान मीडिया से साझा करने से एक संकेत और मिलता है कि लगता है, बात ठीक से बन नहीं रही है। यानी कांग्रेस जिन शर्तों पर चौधरी साहब को अपने साथ जोड़ने के बारे में सोच रही है या प्रस्तावित कर रही है, उस पर चौधरी साहब की सहमति नहीं बन पा रही है। बयान मीडिया से साझा करने का मकसद कांग्रेस तक ये सूचना पहुंचाना भी हो सकता है कि बात उनकी (अजित) शर्तों पर तय नहीं होती तो वह कांग्रेस के दबाव में आने वाले नहीं हैं। उल्लेखनीय होगा कि पिछले चुनावों में राष्ट्रीय लोकदल ने भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और उनके पांच प्रत्याशी, चौधरी अजित सिंह (बागपत), उनके पुत्र जयंती चौधरी (मथुरा), मुजफ्फरनगर के रहने वाले संजय सिंह चौहान (बिजनौर), देवेंद्र नागपाल (अमरोहा-गढ़) और श्रीमती सारिका बघेल (हाथरस) जीत कर लोकसभा पहुंचे थे। चौधरी अजित सिंह इन दिनों लगातार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर वह राष्ट्रीय स्तर पर पार्टियों के साथ तो अपने पार्टी-भविष्य की संभावनाएं टटोल ही रहे हैं, राज्यसभा चुनाव के बहाने भी उनके तरकस के तीर खाली हो रहे हैं।

3 comments:

Jandunia said...

अजीत सिंह को सलाह है सिर्फ निशाना साधने से काम नहीं चलेगा।

Abhimanyu said...

regional parties are like "गिद्द" यह जिस नेशनल पार्टी से समझोता करती है उसे बर्बाद और खुद को आबाद करती है| we have seen how ajit singh RLD, Mayawati BSP and mulayam singh SP did.We have seen how Ajit singh sold JAT community, how mayawati sold harijan and how Yadav been sold to these national parties.

Abhimanyu Tomar said...

http://jatreservation.blogspot.com/2010/06/blog-post.html