Wednesday, April 14, 2010

दिल्ली-यूपी-एमपी में मूर्तियों की सियासत गर्मायी


(sansadji.com)


मूर्ति माल्यार्पण को लेकर कांग्रेस ने चेताया

अब भाजपा भी लगाएगी अम्बेडकर की मूर्ति

बसपा तो महापुरुषों की मूर्तियां बनवाती रहेगी


बुधवार को अंबेडकर जयंती पर मूर्तियों की सियासत कुछ इस कदर गर्मायी कि कांग्रेस और बसपा के मूर्ति-महाभारत में भाजपा भी कूद पड़ी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में घोषणा कर डाली कि डॉ. बीआर अम्बेडकर की जन्मस्थली महू में संविधान निर्माता की सात फुट ऊंची प्रतिमा लगायी जायेगी।
चौहान ने महू में संविधान निर्माता की 119 वीं जयंती पर आयोजित ‘अम्बेडकर महाकुंभ’ में कहा कि अम्बेडकर स्मारक में भू-तल पर अम्बेडकर की सात फुट ऊंची मूर्ति लगायी जायेगी। यह मूर्ति अष्टधातु की बनी होगी, जिसमें बाबा साहेब शाही सोफे पर बैठे दिखेंगे। इसके अलावा, स्मारक में कुछ और मूर्तियां लगायी जायेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अम्बेडकर स्मारक को भव्य स्वरूप देने में पैसे की कोई कमी नहीं आने दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने महू में अम्बेडकर जयंती पर हर साल आयोजित होने वाले ‘अम्बेडकर महाकुंभ’ को ‘पांचवां महाकुंभ’ बताया और कहा कि प्रदेश में भक्त कबीर के सम्मान में भी ऐसा ही आयोजन किया जायेगा। प्रदेश सरकार ने महू में संविधान शिल्पी के स्मारक को दो साल पहले शीर्ष भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के मुख्य आतिथ्य में समारोहपूर्वक लोकार्पित किया था। साथ ही, वहां हर साल अम्बेडकर जयंती को ‘अम्बेडकर महाकुंभ’ की तरह मनाने की परंपरा शुरू की थी, जिसका सारा खर्च सरकार उठाती है। चौहान ने सियासी दलों को नसीहत दी कि वे ‘दलितों के मसीहा’ के नाम पर राजनीति से तौबा कर लें और इस समुदाय के उत्थान की योजनाओं को अमली जामा पहनाने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी में इस बात को लेकर घमासान मचा हुआ है कि बाबा साहेब अम्बेडकर के चरणों में पहले श्रद्धांजलि कौन अर्पित करेगा। अम्बेडकर के नाम पर राजनीति बंद होनी चाहिये। इंदौर में ही जय राम, जय भीम’ का नारा बुलंद करते हुए पूर्व भाजपाध्यक्ष एम. वैंकैया नायडू ने कहा कि कांग्रेस के पचास साल के शासनकाल में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर के योगदान के साथ न्याय नहीं हुआ और दलितों को महज वोट बैंक के रूप में अपनाया गया। नायडू ने इंदौर के नजदीक अम्बेडकर जन्मस्थली महू में ‘अम्बेडकर महाकुंभ’ में कांग्रेस और गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि आजादी के बाद पचास साल तक सत्ता की बागडोर एक ही पार्टी और परिवार के हाथ में थी। इस दौरान सामाजिक समरसता में अम्बेडकर के ऐतिहासिक योगदान के साथ न्याय नहीं किया गया। अम्बेडकर की 119 वीं जयंती पर मध्यप्रदेश सरकार के आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि दलितों के मसीहा को भारत रत्न देने में कितना समय लग गया। यहां तक कि संसद में उनका चित्र भी पचास साल के बाद लग सका। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि दलित समुदाय के हितों की वास्तविक चिंता किये बगैर पचास साल तक उसे महज वोट बैंक के रूप में अपनाया गया। उन्होंने ‘जय राम, जय भीम’ का नारा लगाया और कहा कि ऐसा कहने में हमें कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि हमारे लिये राम भक्त और भीम भक्त अलग-अलग नहीं हैं।
नयी दिल्ली में कांग्रेस ने मूर्ति पर राहुल गांधी को माल्यार्पण न करने देने को लेकर बसपा पर कड़े प्रहार किए। उल्लेखनीय है कि यूपी के अंबेडकर नगर में आज सांसद राहुल को अंबेडकर प्रतिमा पर प्रशासन ने माल्यार्पण नहीं करने दिया। इस पर कांग्रेस के प्रवक्ता शकील अहमद ने आज बहुजन समाज पार्टी पर आरोप लगाया कि वह अंबेडकर की विरासत पर एकाधिकार का प्रयास कर रही है। वह पूरे देश के नेता हैं। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। यह उस विरासत पर एकाधिकार का प्रयास है जो पूरे देश की है। किसी राष्ट्रीय नेता की यादगारी या उपदेशों पर किसी का विशेषाधिकार नहीं है। किसी भी राजनीतिक पार्टी को हमारे राष्ट्रीय नेताओं की विरासत पर एकाधिकार का प्रयास नहीं करना चाहिए। अंबेडकर के मूल्यों, शिक्षाओं और उनके द्वारा बताए गए सदाचार पर किसी एक व्यक्ति का विशेष अधिकार नहीं है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री मायावती और राहुल गांधी का राजनीतिक जंग तीखा हो चला है। बुधवार को भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर दोनों ने ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सबसे मजबूत गढ़ अंबेडकर नगर में कार्यक्रम आयोजित किए और एक दूसरे पर तीखे बाण चलाए। उत्तरप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने बताया कि मार्गों को परिवर्तित करके पूरा प्रशासन ने लोगों को अंबेडकर नगर आने से रोकने की कोशिश की। जिलाधिकार से मेरी लड़ाई हुई। हमने उनसे कहा कि हम बहुत बर्दाश्त कर चुके हैं। विधायक दल के नेता प्रमोद तिवारी ने इससे पहले कहा कि उनकी पार्टी ने अंबेडकर नगर में अंबेडकर की प्रतिमा पर 39 वर्षीय राहुल द्वारा माल्यार्पण के लिए जिला प्रशासन से लिखित में अनुमति ली थी लेकिन प्रशासन ने बाद में मना कर दिया। जिलाधिकारी कुंवर विक्रम सिंह ने कहा कि हमने अनुमति देने से इंकार नहीं किया लेकिन हम कांग्रेस नेताओं को माल्यार्पण की इजाजत तभी देंगे जब बसपा का कार्यक्रम समाप्त हो जाएगा।
लखनऊ में बसपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कांग्रेस को दलित विरोधी करार देते हुए कहा कि दलित नेताओं के नाम पर पार्क एवं स्मारक बनाने और उनकी मूर्तियां लगाने में वह कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हैं। डा.भीमराव अंबेडकर के 119 वें जन्मदिन पर यहां डा.अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचीं मायावती ने पार्टी समर्थकों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस को दलित विरोधी मानसिकता की पार्टी करार दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र में राज कर रही कांग्रेस पार्टी ने कभी भी डा. अंबेडकर समेत किसी दलित नेता का सम्मान नहीं किया। केन्द्र ने उत्तर प्रदेश में 39 तथा केन्द्र में करीब पचास वर्ष तक शासन किया लेकिन कभी भी किसी दलित नेता की मूर्ति नहीं लगाई और ना ही उनका सम्मान किया। यह काम अकेले बसपा ने किया है। कांग्रेस उनकी आलोचना सिर्फ इस लिए करती है क्योंकि वह दलित नेताओं के नाम पर पार्क एवं स्मारक बनवाती हैं और उनकी मूर्तियां लगाती हैं। वह अपना काम करती रहेंगी, चाहे इसके लिए कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। मूर्तियों को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ एक बात और उल्लेखनीय हो गई है कि हाल ही में उनकी एक मूर्ति दुनिया की सबसे बदसूरत मूर्तियों की लिस्ट में शामिल की गई है। अमेरिका से प्रकाशित होने वाली एक मैगजीन ने दुनिया की सबसे बदसूरत मूर्तियों की लिस्ट छापी है। इस लिस्ट में मायावती की एक मूर्ति छठे स्थान पर रखी गई है। इस मूर्ति में मायावती के बगल में बीएसपी के संस्थापक कांशीराम और पीछे बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की मूर्तियां भी हैं। दुनिया की सबसे बदसूरत मूर्तियों के नाम से जारी इस लिस्ट के उपशीर्षक में लिखा गया है - निकृष्ट कला और स्तरहीन राजनीति का मिलन होता है।

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