Saturday, April 3, 2010

सांसद अमर, सांसद जया, और अब संजू बाबा!


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पहले सांसद जया बच्चन, फिर सांसद अमर सिंह और अब छोटे भाई संजय दत्त उर्फ मुन्ना भाई। एक सप्ताह के भीतर तीनों फिल्मी-सियासी शख्सियतों के साथ अदालत और जांच-पड़ताल की बातें जुड़ जाना संयोग भी हो सकता है, सच्चाई भी। बॉलीवुड अभिनेता ‘मुन्ना भाई’ यानी संजय दत्त ने ‘बड़े भाई’ अमर सिंह के साथ सपा से रिश्ता भले समेट लिया, तनाव कायम है। पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान सपा की दोस्ती और भाषणबाजी अब संजू बाबा को खामख्वाह भारी-सी पड़ रही है। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री मायावती के बारे में कथित ‘‘पप्पी झप्पी’’ टिप्पणी के बारे में प्रतापगढ़ जिले की मुख्य दंडाधिकारी अनिरुद्ध कुमार तिवारी ने उन्हें सम्मन जारी करते हुए 24 अप्रैल को अदालत में हाजिर होने के आदेश दिया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने उक्त मामले में हाल में ही दाखिल आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए ये आदेश दिया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार मुख्यमंत्री मायावती के बारे में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर दत्त के खिलाफ पिछले साल 16 अप्रैल को आईपीसी की धारा 294 के तहत प्रतापगढ़ नगर कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। प्राथमिकी की जांच कर रहे पुलिस उपनिरीक्षक ने इस साल 18 मार्च को ही मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अनिरुद्ध कुमार तिवारी की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।
यहां ये भी उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय जरूरत पड़ने पर समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की जांच कर सकता है। न्यायमूर्ति विनोद प्रसाद और न्यायमूर्ति राजेश चंद्र की खंडपीठ ने कानपुर के निवासी शिवकांत त्रिपाठी की रिट याचिका पर यह व्यवस्था दी। त्रिपाठी ने पिछले साल 15 अक्टूबर को अपने शहर के बाबूपुरवा थाने में सपा के पूर्व नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर में सिंह पर उत्तर प्रदेश विकास परिषद के चेयरमैन के पद पर रहते हुए वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया। उस समय अभिनेता अमिताभ बच्चन पर भी अमर सिंह का साथ देने के आरोप लगे थे, लेकिन अमिताभ ने इन आरोपों से इनकार कर दिया था। अमिताभ का कहना था कि अमर सिंह के साथ उनके रिश्तों की वजह से उन पर निशाना साधा जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि अमर सिंह से दोस्ती पर उन्हें कोई शर्म नहीं है। अमर सिंह से नजदीकी के कारण मुझे राजनीतिक दुश्मनी का शिकार होना पड़ रहा है। उस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। अमर सिंह ने आरोपों से इनकार किया। त्रिपाठी इस दलील के साथ अदालत की शरण में गए थे कि प्रवर्तन निदेशालय अमर सिंह के खिलाफ मामले की जांच करे। फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच की जा रही है। अदालत ने ऐसा कोई निर्देश देने से इंकार कर दिया हालांकि उसने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय को जब भी जरूरत महसूस होगी, वह मामले की जांच कर सकता है। अदालत ने पिछले वर्ष पांच दिसंबर को एफआईआर के सिलसिले में अमर की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए स्पष्ट कर दिया था कि राज्यसभा सदस्य को भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत लगाए गए आरोपों पर गिरफ्तार नहीं किया जा सकता हालांकि राज्य सरकार धनशोधन निरोधक कानून के तहत उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के सिलसिले में केन्द्र सरकार के पास जा सकती है, जो सुनवाई के क्रम में उपयुक्त कार्रवाई कर सकती है। इस बीच अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 10 मई निर्धारित की और राज्य सरकार से एफआईआर की जांच संबंधी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। प्रदेश के तत्कालीन डीजीपी द्वारा इस संबंध में भेजे गये प्रस्ताव को मानते हुए गृह विभाग ने देर रात सपा सांसद के विरुद्ध उक्त प्राथमिकी की जांच ईओडब्ल्यू से कराये जाने का आदेश जारी किया था। कानपुर पुलिस ने इस प्रकरण की जांच में कई तरह की दिक्कतों का उल्लेख किया था, जिसको संज्ञान में लेते हुए डीजीपी कार्यालय ने शासन से इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंपे जाने का आग्रह किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि चूंकि मामला कई कंपनियों और उनके शेयर धारकों द्वारा करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी का है, इसलिए मामले की जांच ईओडब्ल्यू से अथवा किसी अन्य जांच एंजेसी से कराया जाना उचित होगा। बाद में पूरा विवरण केन्द्रीय प्रवर्तन निदेशालय के मांगने के साथ ही इस हाई प्रोफाइल मामले की जांच में केन्द्र सरकार भी उसी समय कूद गई थी। इस मामले से जुडे़ दस्तावेजों को केन्द्रीय प्रवर्तन निदेशालय ने मांग लिया था। उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने आवश्यक कागजात तत्काल भेज दिए थे। उस समय राज्य के आला अफसर शशांक शेखर ने बताया था कि अमर सिंह पर अरबो रुपयों के आर्थिक घोटाले के आरोप की सूचना मिलने के बाद भारत सरकार के प्रवर्तन निदेशालय ने आर्थिक अपराध शाखा से अग्रिम कार्रवाई के लिए विस्तृत विवरण मांगा था। रिपोर्ट में अमर सिंह व उनके सहयोगियो द्वारा कूट रचित दस्तावेज तैयार करने लोक सेवक होते हुए गलत ढंग से धन अर्जित करने तथा इन्कम टैक्स की गलत आयकर विवरणी अंकित करने का आरोप है।
चालू सप्ताह के अतीत पर एक नजर और डालें तो सांसद जया बच्चन से जुड़े एक जांच प्रकरण की सुर्खियां ताजा हो जाती हैं। चर्चाएं गर्म होती हैं कि जया एक बार फिर मुसीबत में पड़ सकती हैं। 24 जून 2008 को राज्य सभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी के रूप में तत्कालीन प्रमुख सचिव विधानसभा का आदेश है कि श्रीमती जया बच्चन, निवासी प्रतीक्षा, नार्थ साउथ रोड नम्बर 10, जुहू मुंबई के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराकर कार्रवाई प्रारम्भ की जानी चाहिए। बताया जाता है कि अभी तक उस आदेश पर अमल नहीं हुआ है। ऐसे में अब सरकार से जन सूचना अधिकार के तहत यह सवाल हुआ है कि वह इस आदेश पर अमल करने से क्यों बच रही है? मुख्य सूचना आयुक्त और केंद्रीय निर्वाचन आयोग के समक्ष भी प्रत्यावेदन दाखिल हुए हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार ने आनन-फानन में सारे दस्तावेज तलब किए हैं। विधिक राय ली जा रही है। जया बच्चन ने वर्ष 2006 में जब राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था तो शपथ पत्र में अपने पति के नाम की बाराबंकी की जमीन का उल्लेख नहीं किया था। इसको लेकर स्थानीय कांग्रेसी नेता अमीर हैदर ने 28 जून 2006 को केंद्रीय निर्वाचन आयोग में शिकायत की। आयोग ने इस प्रकरण को निर्वाचन अधिकारी के रूप में उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव के पास भेज दिया। लम्बी जांच पड़ताल, तर्क-वितर्क के बाद प्रमुख सचिव, विधानसभा ने 24 जून 2008 को अपना फैसला सुनाया और लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि श्रीमती जया बच्चन ने दिनांक एक जून 2006 को रिटर्निग आफीसर को दिए गए, शपथ पत्र में सही तथ्यों का उल्लेख नहीं किया है और उसमें श्री अमिताभ बच्चन के नाम की दो जमीनों का उल्लेख न करने के तथ्यों को छिपाया है। यदि नामांकन पत्र के साथ रिटर्निग आफीसर को दाखिल किए गए शपथ पत्र में अभ्यर्थी द्वारा सही तथ्य नहीं दिए गए हैं तो भारतीय दण्ड विधान की धारा 177 के तहत दण्डनीय अपराध है। तदनुसार श्रीमती जया बच्चन, निवासी प्रतीक्षा, नार्थ साउथ रोड नम्बर 10, जूहू मुंबई के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराकर कार्रवाई प्रारम्भ की जानी चाहिए। अमीर हैदर का कहना है कि उसके बाद से वह लगातार लखनऊ के वरिष्ठ अधीक्षक से सम्पर्क कर यह जानने की कोशिश करते रहे कि एफआईआर कब दर्ज होगी? एफआईआर दर्ज करने में क्या अड़चन है? बकौल अमीर हैदर, उन्हें जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तब उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से आरटीआई एक्ट के तहत जानकारी मांगी, निर्धारित समय के अंदर जवाब न मिलने पर उन्होंने अपीलीय अधिकारी आईजी लखनऊ के यहां प्रत्यावेदन दिया लेकिन वहां से भी कोई जानकारी नहीं दी गई। इसकी वजह से उन्हें सूचना आयोग के समक्ष याचिका दायर करने का अधिकार मिल गया। अमीर हैदर ने आयोग में तो याचिका दायर की है, साथ ही इस मामले पर सरकार को घेराबंदी शुरू कर दी है। उन्होंने शासन स्तर पर एक प्रत्यावेदन देकर सरकार से जानना चाहा है कि आखिर वह वजह क्या है कि एफआईआर दर्ज नहीं हो रही है? उन्होंने केंद्रीय निर्वाचन आयोग के समक्ष भी प्रत्यावेदन भेजा है। उनका कहना है कि उन्हें सिर्फ इस सवाल का जवाब चाहिए कि आखिर जया बच्चन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से क्यों बचा जा रहा है?

बाटला हाउस प्रकरणः आज पीएम से मिले बुखारी, कांग्रेस की नजर यूपी के दलितों ही नहीं मुस्लिमों पर भी!


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बाटला हाउस प्रकरण पर मुस्लिम-कांग्रेस राजनीति ताजा हो चली है। आज प्रधानमंत्री अहमद बुखारी से मिले। सांसद राहुल गांधी यूपी रथयात्रा शुरू करने जा रहे हैं। ऐन ऐसे मौके पर पीएम-बुखारी की मुलाकात! रथयात्रा के लिए ये दलित के साथ मुस्लिम फैक्टर तो नहीं। यूपी प्रभारी दिग्विजय सिंह मुठभेड़ पीड़ितों को आश्वस्त कर रही रहे हैं। जिसे मुस्लिम सियासत कहा गया।

आज पीएम-बुखारी मुलाकात के बहाने नए सिरे मुस्लिम सियासत सुगबुगा उठी है। जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने बाटला हाउस के कथित फर्जी मुठभेड़ के सिलसिले में आज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से 35 मिनट मुलाकात की। बाद में इमाम बुखारी ने बताया कि उन्होंने बाटला हाउस मुठभेड़ को फर्जी साबित करने वाले दस्तावेजी सबूत प्रधानमंत्री को दिखाए। इस मुठभेड़ में इंडियन मुजाहिद्दीन के दो संदिग्ध आतंकवादी साजिद और आतिफ मारे गए थे। दोनों उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के रहने वाले थे। मैंने प्रधानमंत्री को साजिद और आतिफ की पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिखाईं। इस रिपोर्ट के मुताबिक दोनों को बहुत करीब से गोली मारी गई थी। इससे पहले उन्हें घसीटा गया था और किसी कुंद वस्तु से मारा भी गया था। इस रिपोर्ट में यह जिक्र भी नहीं है कि किसकी गोली से दोनों की हत्या हुई। सबूतों को देखकर प्रधानमंत्री भी आश्चर्य में पड़ गए। उन्होंने आश्वस्त किया है कि वह इस सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम से मुलाकात करेंगे और कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को उन्होंने जो दस्तावेजी सबूत दिखाए वह उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त किए थे। उल्लेखनीय है कि विगत फरवरी महीने में कांग्रेस महासचिव और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दिल्ली में हुए बटला हाउस काण्ड पर शक जाहिर करते हुए इस मसले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बात कर पुनः जांच कराने का आश्वासन दिया था।
वह बटला हाउस काण्ड के डेढ वर्ष बाद संजरपुर गांव में आरोपियों के परिजनों से भी मिले थे। उसी दौरान दिग्विजय ने मीडिया से कहा था कि उन्होंने संजरपुर गांव में बटला हाउस काण्ड में मारे गये लोगों के परिजनों से लगभग डेढ घण्टे से अधिक समय तक एकान्त में बातचीत की। बातचीत के बाद वह उनके घर से बाहर आये। उन्होंने बटला हाउस काण्ड की जांच पर शक जताते हुए कहा था कि मानवाधिकार आयोग द्वारा जो जांच की गयी थी उसमें पीडित पक्ष को नहीं सुना गया था1 मारे गये युवकों की छपी तस्वीरें भी कुछ ऐसा बयां कर रही थी जिससे मुठभेड के तौर तरीके पर सन्देह लगता है। श्री सिंह ने गांव वालों की मांग पर आश्वासन दिया था कि इससे संबंधित जो भी मुकदमें विभिन्न स्थानों पर चल रहे हैं उन्हें एक ही अदालत में चलवाने का प्रयास किया जाएगा ताकि पीडित लोग परेशान न हों। इस घटना से पार्टी अध्यक्ष सोनियां गांधी और महासचिव राहुल गांधी भी चिन्तित हैं। वह फिर से इस मसले पर प्रधानमंत्री से बात करके पूरे मामले की जानकारी देंगे। बात आगे बढ़ी लेकिन सपा ने उत्तर प्रदेश में दिग्विजय की इस यात्रा को मुद्दा बनाने की कोशिश की। कहा गया कि यह मुस्लिम वोट साधने के लिए कांग्रेस की नई कोशिश है। संजरपुर गांव में श्री सिंह के साथ पूर्व मुख्यमंत्री रामनरेश यादव एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. रीता बहुगुणा जोशी भी गई थीं। इस दौरान उनके वाराणसी से संजरपुर आते समय फरिंहा. मुहम्मदपुर. सरायमीर सहित पांच स्थानों पर उलमा कौंसिल के कार्यकर्ताओं ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया था। आज प्रधानमंत्री की इस मसले पर इमाम बुखारी से मुलाकात ने दिग्विजय सिंह के आश्वासन को बल प्रदान करते हुए ये भी संकेत दे दिया है कि सांसद एवं पार्टी महासचिव राहुल गांधी 14 अप्रैल से उत्तर प्रदेश में रथयात्रा शुरू करने जा रहे हैं। सांसद सोनिया गांधी भी रायबरेली की यात्रा कर आई हैं। अब राहुल की रथयात्रा से कुछ-एक दिन पूर्व बाटला हाउस पर पीएम बुखारी से मिल लिए हैं। इसके पीछे उत्तर प्रदेश की मुस्लिम राजनीति को जोड़ कर देखा जाना कोई अर्थहीन संकेत नहीं माना जा सकता है।

सांसद राजनाथ सिंह ने परमाणु डील के बहाने कांग्रेस पर निशाना साधा


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कानपुर में आज शाम गाजियाबाद से भाजपा सांसद एवं पूर्व पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह सचिन तेंडुलकर द्वार के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पहुंचे। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने परमाणु डील के बहाने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका के साथ भारत न्यूक्लियर डील कर रहा था तब भारतीय जनता पार्टी ने डील के सभी बिन्दुओं पर कड़ा ऐतराज जताया था। भाजपा ने आशंका जताई थी कि यह समझौता अमेरिका के दबाव में किया जा रहा है। हमारी इस आशंका की पुष्टि हो चुकी है। भारत सरकार ने अमेरिका के साथ जिस परमाणु समझौता (सिविल लायबेल्टी फॉर न्यूक्लियर डैमेज बिल) पर हस्ताक्षर किया है, उसके अनुसार होने वाले नुकसान की पूरी भरपाई भारत को ही करनी होगी। समझौते के अनुसार परमाणु सयंत्रो में काफी उपकणों की आपूर्ति अमेरिकी कम्पनियों को ही करनी है, तो नुकसान में भी उनकी हिस्सेदारी होनी चाहिए। क्योंकि रिडियोधर्मिता से दो सौ या चार सौ करोड़ का नुकसान नहीं होता है यह नुकसान कई हजार करोड़ में भी हो सकता है इस सम्बंध में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। इसलिए भाजपा इस मौजूदा बिल को सिरे नकारती है।
उल्लेखनीय है कि कानपुर शहर की जनता की तरफ से कानपुर नगर निगम ने यहां मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के सम्मान में गुलाबी संगमरमर के पत्थरों से भव्य द्वार बनवाया है। द्वार का नाम सचिन रमेश तेंडुलकर सर्वधर्म द्वार रखा गया है। पूर्व भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद राजनाथ सिंह ने आज शाम इस द्वार के उद्घाटन समारोह में सम्मिलित हुए। इस प्रोग्राम में आतिथ्य को लेकर पिछले कुछ दिनों से भाजपा में घमासान मचा हुआ था। कानपुर शहर की काल्पी रोड से दर्शनपुरवा को जोड़ने वाले रास्ते पर बने सचिन रमेश तेंडुलकर द्वार के संबंध में नगर निगम के मेयर पाटनी का कहना है कि सचिन के नाम का यह द्वार 25 फिट ऊंचा और 25 फिट चौड़ा है तथा इसे विशेष गुलाबी रंग के संगमरमर के पत्थरों से बनाया गया है। इसकी लागत करीब दस लाख रूपए आई है। यह सारा पैसा नगर निगम कोटे से लगाया गया है। कार्यक्रम संयोजक पूर्व पार्षद आशुमेन्द्र प्रताप सिंह हैं। वह कहते हैं कि राष्ट्रीय एकता और सद्भावना के प्रतीक द्वार के लोकार्पण समारोह में चिकित्सा, शिक्षा आदि विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 विशिष्ट जनों को सम्मानित किया जा रहा है। समारोह में मुख्य अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव थावर चंद्र गहलोत और विशिष्ट अतिथि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी हैं, जबकि महापौर रवीन्द्र पाटनी अध्यक्षता कर रहे हैं। उद्घाटन सांसद राजनाथ सिंह कर रहे हैं। सचिन रमेश तेंदुलकर सर्वधर्म द्वारा का लोकार्पण करने के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह विशिष्ट जनों का सम्मान भी कर रहे हैं। कार्यक्रम के मुखिया को लेकर नगर भाजपाइयों में घमासान चला। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो रहे हैं, लेकिन इस कार्यक्रम का मुखिया पूर्व पार्षद अंशुमेन्द्र प्रताप सिंह को बनाए जाने को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। विरोधियों का आरोप था कि पूर्व पार्षद हमेशा दलों को बदलते रहते हैं। इनका कांग्रेस व सपा से भी जुड़ाव रहा है और छोटा भाई इस समय कांग्रेस में है। विरोधियों का कहना है कि महापौर को पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष को बुलाना था तो पहले पार्टी की उत्तर और दक्षिण इकाई से सलाह करनी चाहिए थी। ऐसा न करने से पार्टी के अन्दर गुटबाजी को बढ़ावा मिलेगा जो कि पार्टी के लिए ठीक नहीं है।

सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने किया जयराम रमेश का समर्थन



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कांग्रेस और भाजपा सांसद बाकी मुद्दों पर भले जुदा रुख रखते हों, गाउन प्रकरण ने एक प्लेटफार्म पर पहुंचा दिया है। डॉ।मुरली मनोहर जोशी ने साफ कह दिया है कि मैं जयराम के साथ हूं। कहावत सी हो चली है कि गाउन क्यों उतारा जी! उतारा तो क्या बुरा किया? ठीक किया उतार फेंका। केंद्रीय वन और पर्यावरण राज्यमंत्री जयराम रमेश की क्रिया पर वाराणसी के भाजपा सांसद एवं पूर्व पार्टी अध्यक्ष डॉ। मुरली मनोहर जोशी ने सापेक्ष प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बहस को दिशा दे दी है। इंदौर में डॉ.जोशी ने कहा है कि जयराम रमेश ने दीक्षांत समारोंह में चोगा उतार कर अच्छा किया। वे केंद्रीय वन और पर्यावरण राज्यमंत्री की इस सार्वजनिक विरोध का समर्थन करते हैं। उन्होंने एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सार्वजनिक तौर पर कहा कि मैं रमेश के इस कदम का स्वागत करता हूँ। उन्होंने कहा वे स्वयं भी इस चोगे का विरोध कर चुके हैं क्योंकि ऐसा भारतीय संस्कृति में नहीं है। चर्च की संस्कृति के चलते हमारे यहाँ पर डीन और चोगे का आगमन हुआ है। उल्लेखनीय हैं कि कल भोपाल में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के दीक्षांत समारोह में जयराम रमेश ने अपना चोगा उतार दिया था और इस परम्परा को गलत ठहराया था। जयराम रमेश ने कहा था कि किसी प्राचीन परंपरा को ढोते रहने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि मध्ययुगीन पादरी या पोप की तरह इस तरह की पोशाक धारण करके दीक्षांत समारोह में आना उन्हें पसंद नहीं है। उन्होंने कहा कि मौसम भी इस पोशाक के अनुकूल नहीं है। पारंपरिक गाउन पर राजनीतिक बयानबाजी के बाद बहस सी छिड़ गई है कि क्या यह परंपरा अनुचित है। डॉ.जोशी और जयराम से पहले मध्यप्रदेश के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कह चुके हैं कि इसे पहन कर व्यक्ति नमूना लगता है। राज्य की एक अन्य मंत्री अर्चना चिटनीस भी कह चुकी हैं कि दीक्षांत समारोहों में पहना जाने वाला गाउन भारतीय परंपरा और रीति रिवाज का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। बेहतर होगा कि इसके विकल्प की तलाश होनी चाहिए।

जनगणनाः राष्ट्रपति के बाद आज पीएम ने दर्ज कराया अपना ब्योरा


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मानव इतिहास की सबसे बड़ी 1.2 अरब लोगों की 15वीं जनगणनाः 2011 के लिए आज 77 वर्षीय प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने अपना ब्योरा दर्ज कराया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह व्यापक कार्यक्रम विकास कार्यों के लिए योजना बनाने में सूचनाओं के खजाने के रूप में सरकार को मदद करेगा। जनगणना अधिकारी आज सुबह रेस कोर्स स्थित प्रधानमंत्री के घर पहुँचे। उन्होंने सिंह तथा उनकी पत्नी गुरशरण कौर के बारे में ब्योरा दर्ज किया। 15 मिनट की इस अवधि में पीएम ने अपने बारे में सूचना दर्ज कराई। इस दौरान वे काफी उत्साहित थे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लै और भारत के रजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त डॉ. सी. चंद्रमौलि भी उपस्थित थे। जनगणना पंजीयन में अपने बारे में ब्योरा दर्ज कराने वाले सिंह ने देश के हर नागरिक से इस राष्ट्रीय अभियान में शिरकत करने को कहा, ताकि इस प्रक्रिया में हर किसी को शामिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत में जनगणना सांख्यिकीय आँकड़ों को संग्रह करने का विश्व का सबसे बड़ा अभियान है। कुछ आँकड़े तो हमारी आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए योजना बनाने में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं और इससे योजना तथा विकास की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त होती है। हर दस वर्ष के अंतराल पर होने वाली जनगणना सबसे पहले राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के बारे में ब्योरा दर्ज करने के साथ ही एक अप्रैल से शुरू हो गई थी। यह देश की 15वीं जनगणना है, जिसमें 25 लाख से अधिक अधिकारी देश के नागरिकों के बारे में सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जानकारियाँ एकत्र करेंगे। इसमें सबसे अधिक राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर तैयार होगा।

अमेरिकी सांसद के चीन पर आरोप


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चीन पर अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए एक प्रभावशाली अमेरिकी सांसद ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनुचित प्रतिस्पर्धा से अमेरिकी कर्मचारियों के संरक्षण के अधिकार का एक विधेयक लाने का प्रस्ताव किया है। अमेरिकी सीनेटर एलर्न स्पेक्टर ने कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार में गड़बड़ी करने का दोषी है। चीन हमारे व्यापार कानूनों का उल्लंघन करता है, अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियां हड़पता है, हमारे धन लेता है और हमें वह धन कर्ज के तौर पर देता है। स्पेक्टर ने आरोप लगाया कि चीन के अनुचित व्यापार व्यवहार के चलते अमेरिका विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार गंवाता जा रहा है जो देश के कल्याण के लिए चेतावनी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी उद्योग विशेषकर इस्पात क्षेत्र को सबसे बड़ा खतरा चीन से है जो अनुचित व्यापार व्यवहार एवं मुद्रा की विनिमय दरों में छेड़छाड़ कर बाजार को सस्ते माल से पाट रहा है।

राजनाथ आज कानपुर में, भाजपा में घमासान


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कानपुर शहर की जनता की तरफ से कानपुर नगर निगम ने यहां मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के सम्मान में गुलाबी संगमरमर के पत्थरों से भव्य द्वार बनवाया है। द्वार का नाम 'सचिन रमेश तेंडुलकर सर्वधर्म द्वार' रखा गया है। पूर्व भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद राजनाथ सिंह आज इस द्वार का शाम पांच बजे उद्घाटन करेंगे। इसे लेकर भाजपा में घमासान मचा हुआ है।
कानपुर शहर की काल्पी रोड से दर्शनपुरवा को जोड़ने वाले रास्ते पर बने सचिन रमेश तेंडुलकर द्वार के संबंध में नगर निगम के मेयर पाटनी का कहना है कि सचिन के नाम का यह द्वार 25 फिट ऊंचा और 25 फिट चौड़ा है तथा इसे विशेष गुलाबी रंग के संगमरमर के पत्थरों से बनाया गया है। इसकी लागत करीब दस लाख रूपए आई है। यह सारा पैसा नगर निगम कोटे से लगाया गया है। कार्यक्रम संयोजक पूर्व पार्षद आशुमेन्द्र प्रताप सिंह हैं। वह कहते हैं कि राष्ट्रीय एकता और सद्भावना के प्रतीक द्वार के लोकार्पण समारोह में चिकित्सा, शिक्षा आदि विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 विशिष्ट जनों को सम्मानित किया जायेगा। समारोह में मुख्य अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव थावर चंद्र गहलोत और विशिष्ट अतिथि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी होंगे जबकि महापौर रवीन्द्र पाटनी अध्यक्षता करेंगे। उद्घाटन सांसद राजनाथ सिंह को करना है। सचिन रमेश तेंदुलकर सर्वधर्म द्वारा का लोकार्पण करने के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह विशिष्ट जनों का सम्मान भी करेंगे। कार्यक्रम के मुखिया को लेकर नगर भाजपाइयों में घमासान चल रहा है। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे, लेकिन इस कार्यक्रम का मुखिया पूर्व पार्षद अंशुमेन्द्र प्रताप सिंह को बनाए जाने को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विरोधियों का आरोप है कि पूर्व पार्षद हमेशा दलों को बदलते रहते हैं। इनका कांग्रेस व सपा से भी जुड़ाव रहा है और छोटा भाई इस समय कांग्रेस में है। विरोधियों का कहना है कि महापौर को पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष को बुलाना था तो पहले पार्टी की उत्तर और दक्षिण इकाई से सलाह करनी चाहिए थी। ऐसा न करने से पार्टी के अन्दर गुटबाजी को बढ़ावा मिलेगा जो कि पार्टी के लिए ठीक नहीं है।

अपने क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं बिहार के सांसद


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संसद से अवकाश पर होने के दौरान सबसे ज्यादा बिहार के लोकसभा सदस्य अपनी जनता के बीच सक्रिय होते हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी के सांसदों की सक्रियता दूसरे नंबर पर होती है। सबसे ज्यादा निष्क्रियता हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ के संसद सदस्यों की पाई गई है। सक्रिय सांसदों की जनसमस्याओं को मीडिया भी प्रमुखता से उठा रहा है।
बिहार के जद यू सांसद राजवी रंजन उर्फ ललन सिंह दो मई को होने वाली किसान पंचायत में जुटे हैं। उन्होंने सांसद शिवानंद तिवारी के लिए कहा है कि वे उनका लिहाज करते हैं, इसलिए कुछ नहीं कहना चाहते। जदयू सांसद सुशील कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश के प्रयासों को सराहा है। पटना में जदयू सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने 2 मई को होने वाली किसान पंचायत के आयोजकों को दिलजलों की जमात कहे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कम से कम 24 सालों में मुझे इसका तो अहसास नहीं हुआ क्योंकि हमने कभी कोई चाहत ही नहीं रखा। जहां तक शिवानंद तिवारी का सवाल है तो वे उम्र में बड़े हैं और हम उनका लिहाज करते हैं। इसलिये उनकी बात पर प्रतिक्रया देना नहीं चाहते लेकिन दिलजला होने का अनुभव उनसे ज्यादा किसको है। जहां तक बतासा के लिये मंदिर नहीं तोड़ने की बात है तो एक बात स्पष्ट कर दूं कि बतासा की कभी मेरी चाहत भी नहीं रही है। सन 2000 तक कुछ नहीं मिला तब भी पार्टी के साथ रहे। बतासा के लिये इधर से उधर और उधर से इधर करने वाले दूसरे लोग है। सांसद शिवानंद तिवारी सचमुच मंदिर को बचाना चाहते हैं तो पुजारी को सलाह दें, प्रसाद वितरण में भेदभाव न हो। औरंगाबाद में एक स्कूल के उदघाटन समारोह में सांसद सुशील कुमार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षा के महत्व को समझा और बदहाल शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाया। शिक्षा के विकास के लिए कई योजनाएं चलाई गई हैं। भवन विहीन विद्यालयों में कमरों का निर्माण किया जा रहा है। शिक्षकों की नियुक्ति की गई और बहाली की प्रक्रिया जारी है। शिक्षा से ही समाज में फैला निरक्षरता मिटेगी। मुख्यमंत्री ने राज्य से निरक्षरता मिटाने का संकल्प लिया है और इसी संकल्प को ले मुख्यमंत्री अक्षर आंचल योजना चलाई गई है। संसद में औरंगाबाद में केन्द्रीय विद्यालय खोले जाने की मांग उठाई गई जिस पर केन्द्र सरकार ने यहां केन्द्रीय विद्यालय खोलने की स्वीकृति दी है। शीघ्र ही विद्यालय खुलेगा। पुरस्कार से छात्र और छात्राओं के साथ साथ उनके अभिभावकों का मनोबल बढ़ता है। सफल कार्यक्रम व वार्षिक परीक्षा का परिणाम शीघ्र घोषित किए जाने के लिए विद्यालय के प्रधानाध्यापक व शिक्षकों की सराहना की।

फिर दिल्ली पर चढ़ाई करेंगे चौ.अजित


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बागपत(उ.प्र.) के राष्ट्रीय लोकदल सांसद एवं पार्टी सुप्रीमो चौ. अजित सिंह ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के खिलाफ लोकसभा में वैकल्पिक विधेयक लाया जायेगा।फिर एक बार दिल्ली पर चढ़ाई करनी होगी। हरित प्रदेश के बिना बने पश्चिमी यूपी का विकास सम्भव नहीं हो सकता। उनकी पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा समेत कई नेताओं से बातचीत हो चुकी है। रही बात हरित प्रदेश की तो इसकी लड़ाई भी लड़ी जायेगी। चौ. अजित सिंह ने छपरौली विधानसभा क्षेत्र के लोयन मलकपुर, सिनौली, बदरखा, छपरौली का तूफानी दौरा करने के दौरान जनसभाओं में कहा कि गन्ना किसानों ने जिस तरह मूल्य की लड़ाई लड़कर दिल्ली में बैठे नेताओं को अपनी एकजुटता का एहसास करा दिया था, ठीक उसी तरह भूमि अधिग्रहण अधिनियम के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी जायेगी। इसके बाद ही भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 से छुटकारा मिल सकता है। 1894 के अधिनियम में अनेक संशोधन किये गये हैं, लेकिन मुआवजे का निर्धारण करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया और मापदण्ड अभी भी लगभग ज्यों के त्यों हैं। यह कानून वर्तमान के आर्थिक विकास और मानव अधिकारों के बदलते परिदृ़श्य में पूर्णतया अप्रासंगिक हो गया है। हरित प्रदेश भविष्य की लड़ाई है इसे लड़ा जायेगा। बिजली समस्या हो या नहरों में पानी नहीं आना इन तमाम समस्याओं का निस्तारण हरित प्रदेश को अलग राज्य का दर्जा मिलने के बाद ही सम्भव है।

संसद में गूंजेगा उरई जेल उपद्रव मामला


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सपा सांसद घनश्याम अनुरागी ने उत्तर प्रदेश के उरई (जालौन) जिला कारागार में हुए उपद्रव मामले को लोकसभा में उठाएंगे। सपा सांसद ने पूरी घटना के लिए राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। सांसद ने कहा है कि जेल आईजी सुलखान सिंह यह मान चुके है कि दो मुस्लिम बंदियों की मौत के लिए स्थानीय जेल प्रशासन दोषी है फिर भी किसी दोषी के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पूरा कांड राज्य सरकार के स्तर पर रची गयी साजिश के तहत घटित हुआ। जेल अधीक्षक को उच्चस्तर से लेकर जिला प्रशासनस्तर तक संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने यूपी के कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी से सवाल किया है कि वे स्पष्ट करें कि इस घटना को लेकर उनका नजरिया क्या है। सांसद ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से उनकी इस मामले पर बात हो चुकी है। शीर्ष नेतृत्व ने प्रकरण को गंभीरता से लिया है। वे 15 अप्रैल को इस मामले को लोकसभा में उठायेंगे। विधानसभा में भी उनकी पार्टी सरकार को घेरेगी। अगर दोषी जेल अधिकारी बर्खास्त न हुए तो सड़कों पर उतरने से भी परहेज नहीं किया जायेगा। उन्होंने गरौठा के सपा विधायक दीपनारायण यादव पर गैंगस्टर एक्ट लगाने की निंदा की है।

सांसद विक्रम वर्मा ने कहाः एनजीओ नक्सलवाद फैला रहे हैं


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इंदौर में पिछले दिनों सांसद विक्रम वर्मा और नारायण केसरी के अलावा संभाग के विधायकों की मौजूदगी में हुई बैठक में खूब जमकर भड़ास निकाली गई। सांसद वर्मा ने कहा कि हमारे क्षेत्र में कुछ एनजीओ नक्सलवाद फैला रहे हैं। उन पर नजर रखी जानी चाहिए। विधायक मालिनी गौड़ ने कहा मेरी बर्तनवाली बाई का मामला चंदननगर थाने में चल रहा था। मैंने स्वयं ही मामले में पुलिस से बाई की मदद के लिए कहा लेकिन उससे रिश्वत के रूप में 800 रु. धरवा लिए। यह तो हमारे लिए शर्म की बात है कि हमारी सरकार होने के बावजूद रिश्वत देकर काम हो रहा है। यहीं नहीं जिस मल्हारगंज थाना टीआई राकेश व्यास को महिलाओं पर लाठीचार्ज के मामले हटाया उन्हें छत्रीपुरा थाने में बैठा दिया। अब यहां भी वे जनता को तंग कर रहे हैं। विधायक अश्विन जोशी का कहना था शहर में खुलेआम नाइट्रावेट की गोलियां बिक रही हैं, जिस पर ध्यान ही नहीं दिया जाता। प्रशासन को चाहिए कि कुछ दुकानदारों पर कार्रवाई कर दे तो सभी बंद कर देंगे। विधायक रमेश मेंदोला ने भी नाइट्रावेट गोलियां खुलेआम नशे के लिए बेची जाने के उपयोग की शिकायत की। उन्होंने कहा कुछ स्थानों पर खुलेआम वसूली की जा रही है। सांसद विक्रम वर्मा ने कहा कि कुछ नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में एनजीओ के माध्यम से नक्सलवाद पैदा हुआ है। हमारे संभाग में फिलहाल नक्सलवाद तो नहीं है लेकिन कुछ एनजीओ पर नजर रखी जाना चाहिए।

Friday, April 2, 2010

'बर्बरता का प्रतीक गाउन' जयराम रमेश ने उतार फेंका


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भोपाल में आज केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री जयराम रमेश ने भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के दीक्षांत समारोह में यह कहते हुए अपने सफेद कुर्ते के ऊपर पहना पारंपरिक गाउन उतार फेंका कि यह बर्बर औपनिवेशिक अवशेष है। जयराम की इस प्रतिक्रिया पर छात्रों ने देर तक तालियां बजाईं। उन्होंने कहा कि आजादी के 60 साल बाद भी मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि अब तक ऐसे बर्बर औपनिवेशिक अवशेषों से हम क्यों बंधे हुए हैं। 60 साल बाद भी कनवोकेशन ड्रेस पहन रहे हैं यह काफी बोरिंग सी लगती है। ऐसे अवसरों पर हम अपने साधारण वस्त्र क्यों नहीं पहन सकते हैं? मध्ययुगीन सहायक पुजारी अथवा पोप की तरह सजकर आने के बजाए हम साधारण कपड़ों में ही दीक्षांत समारोह क्यों नहीं कर सकते हैं? जयराम आईआईएफएम के कैंपस में 2007 से लेकर 2010 तक के पासआउट छात्रों के सातवें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने आए थे। छात्रों की तरफ संकेत कर जयराम बोले कि मैं जानता हूं कि लगातार भाषण और आभार प्रदर्शन से मुख्य अतिथि के सामने बैठे लोग कितने बोर हो जाते हैं। क्यूं हमें दीक्षांत समारोह में सादे कपड़ों में डिग्री लेना का मौका नहीं मिलता। यह बदलना चाहिए। युवाओं के बीच तैयार की गई स्पीच पढ़ना अच्छा नहीं लगता। ग्रीन मैनेजर्स के लिए शुक्रवार का दिन खास था। पर्यावरण की बागडोर थामे युवा चेहरे पीजीडीएफएम कोर्स पोस्ट मास्टर्स डिप्लोमा इन नैचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट का डिप्लोमा हासिल करने संस्थान के कैंपस में पहुंचे थे। उनका उत्साह बढ़ाने के लिए जयराम रमेश मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। कार्यक्रम की शुरूआत काफी औपचारिक थी। सभी स्टूडेंट्स कंवोकेशन ड्रेस संभालते हुए अपनी जगहों पर बैठे थे और इसके बाद दीक्षांत समारोह शुरू होने की घोषणा की गई। लगभग 137 विद्यार्थियों को डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट डॉ.पीजे दिलीप कुमार ने डिप्लोमा दिए। इस बीच एक-दो मौके ऐसे भी आए जब मंच पर विद्यार्थियों को अपनी हैट संभालनी पड़ी।

जद यू में घमासान चालू आहे, सांसद तिवारी बोले- ललन को मना लूंगा


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बिहार और झारखंड में अंदरूनी कलह से जूझ रही जनता दल (युनाईटेड) अब राजीव रंजन उर्फ लल्लन सिंह और प्रभुनाथ सिंह जैसे पार्टी के असंतुष्टों के साथ मेलमिलाप की राह पर चल पड़ी है। पार्टी के प्रवक्ता सांसद शिवानंद तिवारी ने आज कहा कि लल्लन और अन्य असंतुष्ट नेताओं के साथ मेलमिलाप के लिए ईमानदार और ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। लंबे समय से लल्लन के करीबी माने जाने वाले तिवारी ने उनसे व्यक्तिगत संपर्क रखने का हवाला देते हुए कहा कि मुझे लगता है कि मैं उन्हें समझाने में कामयाब हो जाऊंगा। मौके पर मौजूद जदयू के प्रदेश अध्यक्ष विजय चौधरी ने कहा कि इस संबंध में आगामी छह अप्रैल को वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बैठक भी आहूत की गई है। हालांकि उन्होंने लल्लन और प्रभुनाथ सिंह द्वारा दो मई को राजद नेता अखिलेश प्रसाद सिंह, नागमणी, शंभुनाथ श्रीवास्तव और निर्दलीय सांसद दिग्विजय सिंह के साथ मिलकर ‘महाकिसान पंचायत’ का आयोजन करने की आलोचना भी की।
बिहार जदयू में कलह कोई नई बात नहीं है। अप्रैल 2008 में सत्ताधारी जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के नवनियुक्त उपाध्यक्ष मोनाजीर हसन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उसी सप्ताह उन्हें राज्य के मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था। हसन मुख्यमंत्री नीतिश कुमार द्वारा मंत्री पद से हटाए जाने से नाराज थे। नीतिश ने मंत्रिमंडल से हटाए जाने के तुरंत बाद उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बना दिया था। हसन ने कहा था कि उन्होंने राज्य के 8.3 करोड़ जनसंख्या में 16.5 प्रतिशत मुसलमानों की दयनीय स्थिति के विरोध में इस्तीफा दिया। नीतिश कुमार की सरकार ने भी राज्य के मुस्लिम समुदाय की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए कुछ नहीं किया। हसन के इस्तीफे से राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने के नीतिश के प्रयास को झटका लगा था। नीतिश ने उन दिनों सरकार के कामकाज में सुधार के लिए 10 मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटा दिया था और उनकी जगह पर 19 नए मंत्रियों की नियुक्ति कर ली थी। इसके बाद नीतीश कुमार के खास कहे जाने वाले प्रदेश जदयू अध्यक्ष और सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह नाराज हो गए। उन्होंने पार्टी में लोकतांत्रिक अभाव का मुद्दा उठाते हुए प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव से उन्हें पदमुक्त करने का अनुरोध किया। उनकी शिकायत थी कि दल में बाहर से आने वालों को अधिक महत्व मिल रहा है जबकि पुराने लोग उपेक्षित हैं। लोकसभा चुनावों में नीतीश कुमार से रिश्तों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के निशाने पर रहे और चर्चाओं के केन्द्र बने ललन सिंह हालांकि पार्टी में बने रहे। ललन का कहना था कि पार्टी में लोकतंत्र की स्थापना के लिए हरसंभव संघर्ष करेंगे। शरद यादव का कहना था कि पार्टी की बात पार्टी के अन्दर ही समझाएंगे। उन्होंने नई दिल्ली में स्वीकार किया था कि दल के अंदर बहुत कुछ ठीक-ठाक नहीं है। ललन सिंह लंबे समय से नाराज चल रहे थे। उनकी तात्कालिक नाराजगी पार्टी से बाहर जा चुके नेता उपेन्द्र कुशवाहा की फिर से सम्मानजनक वापसी बताई जा रही थी। कुशवाहा पिछले जदयू में वापस लौटे और नीतीश कुमार ने उन्हें खासा महत्व भी देना शुरू किया। सरकार और संगठन में ललन सिंह की जबर्दस्त चलती रही थी, लेकिन नीतीश ने जब उन्हें महत्व देना छोड़ दिया, सरकारी पदों पर पदस्थापन और नियुक्तियों में उनके सुझाव नहीं माने, अपनी मर्जी से पसंदीदा अफसरों और दूसरे नेताओं को महत्व दिए, राजद तथा दूसरे दलों से आए पिछड़ी और अतिपिछड़ी जाति के नेताओं को महत्वपूर्ण ओहदे देने शुरू किए, खासकर सवर्ण जातियों की उपेक्षा की जाने लगी तो ललन सिंह को अध्यक्ष पद से अलग होना पड़ा। इसके बाद पार्टी में एक बार फिर उस समय सांगठनिक नैया डांवाडोल हो चली, जब महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर शरद और नीतीश पक्ष-विपक्ष बन गए। इससे शरद यादव को झटका लगा। पार्टी मीडिया की सुर्खियां बनी। नीतीश ने शरद के लोगों की अनदेखी कर बिहार में रैली कर डाली। इससे मनोमालिन्य और बढ़ गया। बिहार के साथ ही झारखण्ड जद यू में भी कलह खुल कर सामने आ गई है। तमार से विधायक राजा पीटर प्रदेश अध्यक्ष दल के नेता नहीं बनाए जाने से नाराज चल रहे हैं। नाराज़गी ऐसी कि इस बार बजट सत्र में एक बार भी सदन नहीं गए। मान मनव्वल का लम्बा दौर चला, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। कई बार बैठकें हुईं, लेकिन नहीं माने। पार्टी के कई पदाधिकारियों ने केंद्रीय नेतृत्व को पत्र भेज कर राजा पीटर को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की भी मांग की। राजा पीटर ने कहा कि उन्हें अब जाकर शीर्ष नेताओं से विधायक दल का नेता बनाए जाने का आश्वासन मिला है। वो मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष जलेश्वर महतो की कार्यशैली से नाराज हैं। ये वही राजा है जिन्होंने तमार विधानसभा के लिए हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को हरा कर इतिहास रच दिया था।

सांसद अमर सिंह की सुनवाई अब 10 मई को


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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय जरूरत पड़ने पर समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की जांच कर सकता है। न्यायमूर्ति विनोद प्रसाद और न्यायमूर्ति राजेश चंद्र की खंडपीठ ने कानपुर के निवासी शिवकांत त्रिपाठी की रिट याचिका पर यह व्यवस्था दी। त्रिपाठी ने पिछले साल 15 अक्टूबर को अपने शहर के बाबूपुरवा थाने में सपा के पूर्व नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर में सिंह पर उत्तर प्रदेश विकास परिषद के चेयरमैन के पद पर रहते हुए वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया। उस समय अभिनेता अमिताभ बच्चन पर भी अमर सिंह का साथ देने के आरोप लगे थे, लेकिन अमिताभ ने इन आरोपों से इनकार कर दिया था। अमिताभ का कहना था कि अमर सिंह के साथ उनके रिश्तों की वजह से उन पर निशाना साधा जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि अमर सिंह से दोस्ती पर उन्हें कोई शर्म नहीं है। अमर सिंह से नजदीकी के कारण मुझे राजनीतिक दुश्मनी का शिकार होना पड़ रहा है। उस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। अमर सिंह ने आरोपों से इनकार किया। त्रिपाठी इस दलील के साथ अदालत की शरण में गए थे कि प्रवर्तन निदेशालय अमर सिंह के खिलाफ मामले की जांच करे। फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच की जा रही है। अदालत ने ऐसा कोई निर्देश देने से इंकार कर दिया हालांकि उसने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय को जब भी जरूरत महसूस होगी, वह मामले की जांच कर सकता है। अदालत ने पिछले वर्ष पांच दिसंबर को एफआईआर के सिलसिले में अमर की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए स्पष्ट कर दिया था कि राज्यसभा सदस्य को भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत लगाए गए आरोपों पर गिरफ्तार नहीं किया जा सकता हालांकि राज्य सरकार धनशोधन निरोधक कानून के तहत उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के सिलसिले में केन्द्र सरकार के पास जा सकती है, जो सुनवाई के क्रम में उपयुक्त कार्रवाई कर सकती है। इस बीच अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 10 मई निर्धारित की और राज्य सरकार से एफआईआर की जांच संबंधी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। प्रदेश के तत्कालीन डीजीपी द्वारा इस संबंध में भेजे गये प्रस्ताव को मानते हुए गृह विभाग ने देर रात सपा सांसद के विरुद्ध उक्त प्राथमिकी की जांच ईओडब्ल्यू से कराये जाने का आदेश जारी किया था। कानपुर पुलिस ने इस प्रकरण की जांच में कई तरह की दिक्कतों का उल्लेख किया था, जिसको संज्ञान में लेते हुए डीजीपी कार्यालय ने शासन से इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंपे जाने का आग्रह किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि चूंकि मामला कई कंपनियों और उनके शेयर धारकों द्वारा करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी का है, इसलिए मामले की जांच ईओडब्ल्यू से अथवा किसी अन्य जांच एंजेसी से कराया जाना उचित होगा। बाद में पूरा विवरण केन्द्रीय प्रवर्तन निदेशालय के मांगने के साथ ही इस हाई प्रोफाइल मामले की जांच में केन्द्र सरकार भी उसी समय कूद गई थी। इस मामले से जुडे़ दस्तावेजों को केन्द्रीय प्रवर्तन निदेशालय ने मांग लिया था। उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने आवश्यक कागजात तत्काल भेज दिए थे। उस समय राज्य के आला अफसर शशांक शेखर ने बताया था कि अमर सिंह पर अरबो रुपयों के आर्थिक घोटाले के आरोप की सूचना मिलने के बाद भारत सरकार के प्रवर्तन निदेशालय ने आर्थिक अपराध शाखा से अग्रिम कार्रवाई के लिए विस्तृत विवरण मांगा था। रिपोर्ट में अमर सिंह व उनके सहयोगियो द्वारा कूट रचित दस्तावेज तैयार करने लोक सेवक होते हुए गलत ढंग से धन अर्जित करने तथा इन्कम टैक्स की गलत आयकर विवरणी अंकित करने का आरोप है।

पासवान के जनपथ आवास में फिर आग!


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आखिर बात क्या है? दिल्ली के जनपथ पर फिर उसी आवास में आग, जिसमें सार्ट सर्किट से ही पिछली साल भी यही वाकया हुआ था। नयी दिल्ली में आज पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी अध्यक्ष रामविलास पासवान के 12 जनपथ स्थित आवास पर दोपहर में आग लग गयी, जिसमें दो कारें जल गईं। दमकल अधिकारियों ने बताया कि पासवान के 12 जनपथ स्थित आवास के गेराज में करीब 3.15 बजे आग लगने की रिपोर्ट आयी और तीन दमकल की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। उन्होंने बताया कि फाइबर शीट में आग शार्ट सर्किट के कारण लगी। इस घटना में एक ऑडी और एक होंडा एकॉर्ड कारें जल गयीं। हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ। जब घटना हुई उस समय लोजपा प्रमुख पटना में थे। पिछले साल 13 मई को इसी मकान में शार्ट सर्किट के कारण आग लगी थी।

सांसद ने सुना..राष्ट्रपति ‘प्रभा देवी’ और 'मनमोहन जोशी'



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देश की राष्ट्रपति का नाम प्रभादेवी और पूर्व भाजपा अध्यक्ष मनमोहन जोशी! दिल्ली के एक कार्यक्रम में इसी तरह मंच से संबोधित किया गया राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल और वाराणसी (उ.प्र.) के भाजपा सांसद डॉ.मुरली मनोहर जोशी को। उस दौरान मंच पर कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य एवं कवियत्री प्रभा ठाकुर भी मंचासीन थीं। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को आज सार्वजनिक समारोह में उस समय ऐसी विचित्र स्थिति का सामना करना पड़ा, जब मंच से उनके नाम का गलत उच्चारण किया गया। राष्ट्रपति यहां नई दिल्ली में एक्शन कैंसर अस्पताल का उदघाटन करने पहुंची थीं। एक्शन कैंसर अस्पताल के संयोजक आर।के। गुप्ता ने अपने स्वागत भाषण के दौरान राष्ट्रपति का जिक्र करते हुए प्रतिभा पाटिल के स्थान पर 'प्रभा देवी' कहा। गुप्ता को जब अपनी गलती महसूस हुई तो उन्होंने तुरंत माफी मांगी और उसमें सुधार कर दिया। इस समारोह में सांसद एवं कवियत्री प्रभा ठाकुर भी मंच पर बैठी हुई थीं। इसी प्रकार से मंच का संचालन कर रही युवती ने मंच पर बैठे हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री डा.मुरली मनोहर जोशी को केंद्रीय मंत्री मनमोहन जोशी कहा।

खबरें संसद, सांसद और पूर्व सांसद की



फर्रुखाबाद के कांग्रेस सांसद सलमान खुर्शीद (केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री)। उनके क्षेत्र के लिए सांसद कोटे की विकास निधि की दूसरी किस्त एक करोड़ रुपये जारी हो गयी है। विकास कार्यो के प्रस्ताव श्री खुर्शीद से आमंत्रित किये हैं। यहां के सभी विधायकों को 1 करोड़ 25 लाख कुल 5 करोड़ रुपये मिले थे। सांसद निधि के अवशेष एक करोड़ रुपये का ड्राफ्ट प्राप्त हो गया है। पूर्व में प्राप्त एक करोड़ रुपये की धनराशि के सापेक्ष उन्होंने चार बरातघरों के निर्माण के लिए धनराशि औद्योगिक विकास निगम को स्थानांतरित किये जाने के निर्देश दिये थे। उल्लेखनीय है कि सांसद निधि की अवशेष धनराशि वित्तीय वर्ष के साथ लैप्स होने का प्रावधान नहीं है।

पूर्व सांसद के संबंधी की फाइल खुली
सहारनपुर (उ।प्र।) स्थित नानौता में लोन के नाम पर धोखाधड़ी करने के आरोप में फंसे पूर्व सांसद रशीद मसूद पुत्र शादान मसूद के बाद पुलिस ने उनके भतीजे जीशान मसूद पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि जीशान समेत छह के विरुद्ध बैंक की बंधक संपत्ति का फर्जी तरीके से क्रय-विक्रय करने की सिटी कोतवाली में दर्ज मुकदमे की फाइल खोल दी है। वर्तमान में यह मामला बेहट पुलिस के पास है।

बिहार में मनाया मीरा का जन्मदिन
भभुआ (कैमूर) जिला कांग्रेस कार्यालय शहीद भवन में क्षेत्रीय सांसद एवं लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार का 65वां जन्म दिन मनाया गया। इस मौके की अध्यक्षता दीनानाथ गिरी व संचालन अत्रि भारद्वाज ने किया। बैठक में वक्ताओं ने मीरा कुमार के प्रशासनिक एवं राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके दीर्घायु होने और लंबे समय तक देश के सर्वोच्च पद पर रहने की कामना की।

12 को संसद घेरेंगे ऑटो चालक
दिल्ली के तिपहिया वाहन चालकों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो 12 अप्रैल को संसद का घेराव किया जाएगा। दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ के महामंत्री राजेंद्र सोनी ने कहा है कि हाल ही में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा था कि दिल्ली सरकार लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विकल्प पर विचार कर रही है।

पाक और अमेरिकी संसदों में हलचल



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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने आज संसद में संवैधानिक सुधार पैकेज पेश कर दिया। चार्टर ऑफ डेमोक्रेसी के मद्देनजर सांसदों की एक संवैधानिक सुधार समिति की सिफारिशों के आधार पर 18वां संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश हुआ है। चार्टर ऑफ डेमोक्रेसी पर सत्तारूढ़ पीपीपी और विपक्षी पीएमएल-एन के बीच 2006 में दस्तखत किए गए थे। गिलानी ने 18वें संशोधन विधेयक का जिक्र करते हुए कहा कि हमने राष्ट्र से वादा किया था कि हम पूर्ववर्ती सैन्य शासनों द्वारा संविधान में किए गए बदलावों को हटा देंगे और अब हम इसे पूरा कर रहे हैं। इसमें राष्ट्रपति के अधिकारों को समाप्त करने के लिहाज से व्यापक संशोधन शामिल हैं। इन अधिकारों में तीनों रक्षा सेवा प्रमुखों की नियुक्ति और संसद को भंग करने के अधिकार भी हैं। सीनेट और नेशनल असेंबली में पैकेज पेश करते हुए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। पैकेज में संविधान के चौथाई अनुच्छेदों में संशोधन कर दिया गया है। पैकेज का मसौदा तैयार करने वाली संसदीय समिति ने संविधान के 70 अनुच्छेदों में 100 से अधिक संशोधन का सुझाव दिया है। संसदीय समिति में सभी बड़े दलों के सदस्य हैं और इसका गठन पिछले साल किया गया था, जबकि पीपीपी और पीएमएल-एन ने जिया उल हक और परवेज मुशर्रफ के सैन्य शासन में संविधान में किए गए बदलावों को हटाने की बात कही थी। उधर, व्यापक परमाणु परीक्षण संधि [सीटीबीटी] की पुष्टि कराने को ओबामा प्रशासन अमेरिकी संसद की शरण में जाने के लिए कमर कस रहा है। यह राष्ट्रपति ओबामा द्वारा किए गए वादे के तहत एक महत्वपूर्ण कदम होगा। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वादा किया था कि वह इस संधि की जल्द से जल्द पुष्टि कराने का प्रयास करेंगे। वर्ष 1999 में अमेरिकी सीनेट ने सीटीबीटी की पुष्टि करने से इनकार कर दिया था लेकिन अपने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान बराक ओबामा ने राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर सीटीबीटी को सीनेट से जल्द से जल्द हरी झंडी दिलाने का वादा किया था।

एनएसी में कौन-से दो सांसद शामिल होंगे?


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संप्रग सुप्रीमो सोनिया गांधी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में दो सांसदों को भी शामिल कर सकती हैं। लेकिन दोनों ही सांसद ऐसे होंगे, जो किसी मंत्रालय का कार्यभार न देख रहे हों। उल्लेखनीय है कि एनएसी के प्रावधानों के अनुसार कोई भी सांसद, जो एनएसी का सदस्य हो, वह परिषद से किसी प्रकार की सुविधाएं, भत्ते या पारितोषिक नहीं ले सकता। अटकलें लगाई जा रही हैं कि सोनिया जिन दो सांसदों को अपनी परिषद में शामिल कर सकती हैं, वे आखिर कौन हो सकते हैं? साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष आगामी संसद सत्र शुरू होने से दो दिन पहले 13 अप्रैल को पंजाब के दौरे पर भी जाएंगी। वह पंजाब में जलियांवाला बाग में आजादी के शहीदों को श्रद्धा सुमन चढ़ाएंगी। फरवरी 2007 में उन्होंने जंडियाला में भी चुनावी रैली को संबोधित किया था। वर्ष 2009 के रेमन मैगसायसाय पुरस्कार विजेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता दीप जोशी और 2002 में हुए गुजरात दंगों के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से इस्तीफा देने वाले हर्ष मंदर को नई राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) का सदस्य बनाया जा सकता है। परिषद में जोशी और मंदर के अलावा पूर्व आईएएस अधिकारी एन सी सक्सेना और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी को भी शामिल किए जाने की चर्चाएं हैं। गौरतलब है कि सोनिया गांधी को दोबारा इस परिषद का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। गांधी अपनी नई टीम के गठन में लगी हैं और वह जल्द ही इसकी घोषणा कर सकती हैं। उधर, कांग्रेस के 125वें स्थापना दिवस के सालभर चलने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत अमृतसर से करने को लेकर कांग्रेस हाईकमान काफी दिनों से तैयारी कर रहा था। पंजाब कांग्रेस ने इसमें शिरकत करने के लिए प्रधानमंत्री को भी आमंत्रित किया था, लेकिन उनके उस समय विदेश दौरे की वजह से आना संभव नहीं दिख रहा है। सोनिया गांधी के 13 अप्रैल को पंजाब जा रही हैं। पंजाब कांग्रेस उनकी सभा की तैयारी में भी जुटी है। वह अब छह साल बाद श्रीदरबार साहिब और श्री दुर्ग्याणा तीर्थ भी जा सकती हैं।

केंद्र से पैकेज मांग रहे दो राज्यों के सांसद


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इन हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के भाजपा-कांग्रेस सांसद अपने राज्यों के औद्योगिक पैकेज को लेकर केंद्र सरकार की ओर निगाहें लगाए हुए हैं। कांग्रेस सांसद सतपाल महाराज, विजय बहुगुणा पिछले दिनों पीएम से गुहार लगा चुके हैं, अब हिमाचल के सांसदों की बारी है। हिमाचल प्रदेश के लिए औद्योगिक पैकेज मांगने प्रदेश का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री डा। मनमोहन सिंह से मिलेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में सभी मंत्री, विधानसभा में प्रतिपक्ष की नेता, सत्तारूढ़ व विपक्षी दलों के प्रदेशाध्यक्ष और प्रदेश के सभी सांसद सम्मिलित होंगे। प्रदेश सरकार 2004 से लगातार केंद्र से आग्रह करती आ रही है कि भारत के उत्तर पश्चिम में स्थित तीन प्रदेशों हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा केंद्र में एनडीए की सरकार के समय जनवरी, 2003 में 10 वर्षो के लिए विशेष औद्योगिक पैकेज की घोषणा कर इसकी अवधि 31 मार्च, 2013 तक निर्धारित की गई थी। यूपीए सरकार ने वर्ष 2004 में सत्ता में आते ही इस अवधि को घटाकर मार्च, 2007 तक कर दिया था। राज्य में तब भी इस निर्णय का विरोध किया गया था और केंद्र से अवधि यथावत रखने का आग्रह किया गया था जिस पर केंद्र ने इस औद्योगिक पैकेज को तीन वर्ष के लिए अर्थात मार्च 2010 तक बढ़ाया था। प्रदेश ने तब भी यह मांग दोहराई थी। पैकेज समाप्त होने की अवधि तक भी केंद्र ने इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया तो प्रदेश सरकार ने राज्य विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यह आग्रह किया था कि पैकेज को न बढ़ाने के कारण हुई अनिश्चितता से प्रदेश को जो क्षति हुई है उसकी पूर्ति के लिए इस औद्योगिक पैकेज को 2020 तक बढ़ाया जाए। उधर, उत्तराखंड के लिए औद्योगिक पैकेज की अवधि बढ़ाने का मुद्दा गहराता जा रहा है। कांग्रेस और भाजपा में असमंजस बना हुआ है। मुख्यमंत्री कैबिनेट समेत प्रधानमंत्री के दरबार में दुखड़ा सुना चुके हैं तो कांग्रेस के प्रांतीय क्षत्रप यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री को अपनी राजनीतिक परेशानी बता चुके हैं। जो संकेत हैं, उससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार यूपी, हरियाणा व पंजाब के दबाव में है। यही कारण है कि उत्तराखंड की दलील से सहमत होने के बावजूद केंद्र सरकार कोई पहल नहीं कर पाई है। केंद्र सरकार ने अपनी परेशानी बताकर उत्तराखंड के नेताओं को धर्मसंकट में डाल दिया है। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को औद्योगिक पैकेज की अवधि बढ़ाने के मामले में सकारात्मक कार्यवाही के लिए आश्वस्त किया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी आरके धवन के नेतृत्व में प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत, उप नेता तिलकराज बेहड़ व टिहरी के सांसद विजय बहुगुणा सोनिया गांधी से मिल चुके हैं।

सांसद लालू की निगाह बिहारी मुस्लिमों पर


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बिहार में इन दिनों राजद सुप्रीमो एवं सारन (बिहार) के पार्टी सांसद लालू प्रसाद और लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान कुछ इस कदर व्यस्त हो चले हैं, दिल्ली उनके एजेंडे से कहीं भटक-सी गई है। निगाहें आगामी विधानसभा चुनावों पर हैं और प्रदेश के मुसलिम-पिछड़े वोट बैंक पर। पटना के गांधी मैदान में जमीयत उलेमा के सम्मेलन में दोनों नेताओं ने मुस्लिम समुदाय की गुहार लगाई।
लालू ने कहा कि एक कतरा खून रहने तक मुसलमानों के लिए संघर्ष करते रहेंगे। जब तक पिछड़े मुसलमानों और दलितों को महिला आरक्षण बिल में स्थान नहीं मिलेगा, तब तक इस बिल को लोकसभा से पारित नहीं होने दिया जायेगा। महिला आरक्षण की जरुरत इस देश को नहीं है। साजिश के तहत इस बिल को लाया गया है। अभी थोड़ा बहुत विरोध हो रहा है। लोकसभा में बिल पेश किया गया तो लोकसभा से लेकर सड़क तक आंदोलन छेड़ दिया जायेगा। केन्द्र सरकार को महंगाई की चिंता नही है और महिला आरक्षण बिल ले आयी। मुसलमान महिला आरक्षण बिल का विरोध करें। रामविलास ने कहा कि हिन्दू दलितों की तरह पिछड़े मुसलमानों को भी आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। सच्चर कमेटी ने भी दस प्रतिशत अलग से पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण देने की सिफारिश की है। महिला आरक्षण बिल में दलितों के लिए अलग से व्यवस्था होनी चाहिए। बंलादेशी और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विरोध पर राजनीति बंद होनी चाहिए। जमीयत ए हिन्द के नेता व राज्यसभा सदस्य सैयद महमूद असद मदनी ने कहा कि इस्लाम धर्म में जातिवाद नही है, लेकिन मुसलमान भी जातिवाद कर रहे हैं। ऐसी प्रवृति पर रोक लगनी चाहिए।

राहुल गांधी की तरफदारी में कुलपति की कुर्सी गई


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इंदौर में देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय (डीएवीवी) में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के एक कार्यक्रम के बाद से विवादों में घिरे कुलपति डा. ए.एस. सहरावत ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया। डीएवीवी में छात्रों को राहुल से मिलने की इजाजत देने पर राज्य सरकार ने उनसे जवाब-तलब किया था। राज्य सरकार ने ऐसे संकेत दिये थे कि मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 की धारा 52 के तहत उन्हें डीएवीवी के कुलपति पद से हटाया जा सकता है लेकिन, उन्होंने खुद ही इस्तीफा देना ज्यादा ठीक समझा। प्रदेश के राज्यपाल व कुलाधिपति रामेश्वर ठाकुर ने सहरावत का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। सहरावत ने यहां कहा कि विश्वविद्यालय का माहौल शांतिपूर्ण नहीं था और मेरे मिजाज से मेल नहीं खा रहा था। लिहाजा, मुझे इस्तीफा देना पड़ा। इस साल 19 जनवरी को राहुल गांधी ने डीएवीवी परिसर में सैकड़ों छात्रों से राजनीति समेत विभिन्न मुद्दों पर बात की थी। भाजपा की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कार्यक्रम की मंजूरी देने के लिए सहरावत पर डीएवीवी के कांग्रेसीकरण का आरोप लगाया था।

नीतीश सरकार को लगातार ललकार रहे सांसद ललन सिंह


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बिहार के जदयू सांसद एवं पूर्व प्रदेश राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह लगातार राज्य में घूम-घूम कर जनता के बीच ललकार रहे हैं। निशाने पर हैं बिहार सरकार की नीतियां। इससे जदयू की अंदरूनी हलचल बढ़ती जा रही है। इसे पार्टी अध्यक्ष एवं मधेपुरा (बिहार) सांसद शरद यादव तथा सीए नीतीश कुमार की अंदरूनी रिक्तता से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। अब ताजा सूचना ये है कि 6 अप्रैल को पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने के लिए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने सांसद ललन और पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह को भी बुलावा भेजा है। ललन सिंह व प्रभुनाथ सिंह राज्य कार्यकारिणी के सदस्य हैं। उन्हें इसलिए आमंत्रित किया गया है, वे मंचों से बात करने की बजाय बैठक में अपनी बातें रखें। पार्टी का मानना है कि बटाईदारी के मसले पर निर्दल सांसद (बांका) दिग्विजय सिंह के साथ ललन भी भ्रम फैला रहे हैं, जबकि विधान परिषद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार साफ कर चुके हैं कि इस संबंध में कोई कच्चा प्रस्ताव भी सरकार के पास नहीं है। सांसद लालू प्रसाद आदि भी ऐसी बेतुकी बात कहकर जनता को बेवकूफ बनाना चाहते हैं। उधर, अपने निर्वाचन क्षेत्र मुंगेर में सांसद ललन सिंह ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को एक बार फिर अपनी मंशा से आगाह कराते हुए कहा कि वर्तमान में राज्य में अफसरशाही हावी है एवं भ्रष्टाचार चरम पर है। घर की सफाई जरूरी होती है नहीं तो मकान कमजोर हो जाता है। वे घर बनाने वालो में से हैं। घर का मालिक कोई अतिथि नहीं हो सकता वे पार्टी कभी नहीं छोंड़ेंगे। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में मतभेद होते ही हैं जिसका निराकरण बैठ कर जब तक नहीं होगा तब तक वे यह लड़ाई लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद जनता व कार्यकर्ता के दिलो दिमाग में एक ही सवाल उठ रहा है कि पार्टी का सच्चा सिपाही तथा पिछले पंद्रह वर्षो से पार्टी को जिसने सींचने का प्रयास किया वह आखिर प्रदेश अध्यक्ष पद क्यों छोड़ा? जदयू में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की संस्कृति जब हावी होने लगी तो हमने कार्यकर्ताओं के हक और सम्मान के लिए पार्टी से बगावत की। अगर सच बोलना गुनाह है तो समझो हमने गुनाह किया। हमने पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ता मो. सलाम को मुंगेर विधानसभा का प्रत्याशी बना कर सिद्ध कर दिया कि अगर टिकट मिले तो कार्यकर्ताओं को मिले न कि नेताओं के पीए व दलालों को मिले। जब तक जनप्रतिनिधि सजग नहीं रहेंगे तब तक उस क्षेत्र का समुचित विकास नहीं हो सकता है। उन्होंने पार्टी में तीन मुद्दों को उठाया है। पहला पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र कायम करना, दूसरा कार्यकर्ता को मान सम्मान दिलाना तथा तीसरा अफसरशाही पर लगाम लगाना। इस मौके पर राष्ट्रीय राजमार्ग 80, बाहाचौकी, सुंदरपुर, शिवकुंड सहित अन्य जगहों पर कार्यकर्ताओं ने सांसद का जोरदार स्वागत किया। सांसद ललन सिंह ने लखीसराय में कहा कि बंदोपाध्याय कमेटी की रिपोर्ट को रद नहीं किया गया तो वह बिहार के लिये नासूर बन जायेगा तथा यहां गृह युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी। आर-पार की लड़ाई लड़ी जायेगी। बंध्योपाध्याय कमेटी की अनुशंसा रद नहीं की गई तो भूमिहीन किसानों के समक्ष जीवन मरन की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी और लोगों का इस राज्य से पलायन होगा या फिर आपराधिक गतिविधियों की ओर मुखातिब होंगे जिससे गांव का विकास अवरुद्ध होगा। उन्होंने आगामी 02 मई को पटना में आयोजित बंदोपाध्याय कमेटी की रिपोर्ट के खिलाफ किसान रैली में अधिक से अधिक किसानों को जुट कर आने की आह्वान किया। सांसद ने एनएच 80 को फोर लेन में परिवर्तित करने में वैकल्पिक व्यवस्था तलाशने की बात कही। लखीसराय में बाइपास निर्माण के लिए रेलवे ओवर ब्रिज निर्माण की स्वीकृति मिल जाने की जानकारी देते हुए सांसद ने कहा कि रेलमंत्री ने दोनों रेलवे लाइनों पर पुल निर्माण की स्वीकृति दे दी है। इससे पहले विद्यापीठ चौक, सूर्यगढ़ा में सांसद का अभिनंदन पार्टी कार्यकर्ताओं ने किया।

भाजपा की कतार में उमा ही नहीं, कल्याण और गोविंदाचार्य के भी नाम!


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भाजपा के भीतर से एक धुंध थोड़ी छंटती दिख रही है। उमा भारती के लिए लगभग छंट चुकी है। एटा के सांसद कल्याण सिंह और गोविंदाचार्य को भी बुलावे के संकेत मिल रहे हैं। भाजपा सांसद एवं पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कलराज मिश्र ने उमा भारती के पार्टी में लौटने की बात को और विस्ता देते हुए कल्याण सिंह और गोविंदाचार्य के नाम भी सुर्खियों में उछाल दिए हैं। सांसद मिश्र ने हरिद्वार के दिव्य प्रेम सेवा मिशन के महाकुंभ मंथन 2010 में कहा कि उमा भारती, कल्याण सिंह और गोविंदाचार्य का पार्टी में अहम योगदान रहा है। यदि वे भाजपा में आना चाहते हैं तो नेतृत्व इस पर विचार कर सकता है। उमा, कल्याण और गोविंदाचार्य अपने कारणों से पार्टी से अलग हो गए थे। यदि ये सभी वापसी करना चाहते हैं तो नेतृत्व इस पर विचार कर सकता है। इसके साथ सांसद मिश्र यूपी पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि वहां सब कुछ पटरी पर उतरा हुआ है। सीएम मायावती अपना बर्थडे मनाने के नाम पर जनता का धन लुटा रही हैं। जनता सपा से भी दूर हो चुकी है। कांग्रेस में बिखराव है। इन हालात में विकल्प भाजपा है। भाजपा पूरे देश में महंगाई के खिलाफ धरना, प्रदर्शन और रैलियां निकाल रही है। 21 अप्रैल को संसद के सामने पार्टी पूरी ताकत से प्रदर्शन करने जा रही है।

Thursday, April 1, 2010

सपा की 'कंगाली' पर खबर गर्म!


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समाजवादी पार्टी का खजाना खाली होने की बात मीडिया ने उछाल दी है। खबर को 'अप्रैल फूल' भी मान लें, तो उसके भीतर रेंगती बाकी सूचनाएं यकीन करने को विवश करती हैं। सूचनाएं पार्टी अध्यक्ष एवं मैनपुरी से सांसद मुलायम सिंह यादव का नाम लेते हुए प्रसारित की गई हैं। खबर में कहा गया है कि " उत्तर प्रदेश में जहां सत्तारूढ़ बसपा में नोट बरस रहे हैं वहीं समाजवादी पार्टी की आर्थिक हालत अमर सिंह के निकाले जाने के बाद से बिगड़ती जा रही है। पार्टी ने अगला विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों से आवेदन के साथ दस-दस हजार रुपए मांगे हैं। यह भी साफ कर दिया है कि टिकट न मिलने की स्थिति में यह राशि लौटाई नहीं जाएगी। जानकारों के अनुसार ऐसा पहली बार हो रहा है। इसे पार्टी फंड में राशि जमा करने का तरीका माना जा रहा है। सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने सभी जिलाध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं को इस संबंध में पत्र भेजे हैं। सूत्रों के अनुसार उन्होंने लिखा है कि 2012 में होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक लोग 30 अप्रैल तक अपना आवेदन भेज दें। साथ में दस हजार रुपए की राशि भी जमा करवाएं। टिकट न मिलने की स्थिति में यह राशि वापस नहीं की जाएगी। सपा में चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों से पहली बार ऐसी फीस मांगी जा रही है। पार्टी के कुछ कर्मठ कार्यकर्ता व विधायकों ने इस पर आश्चर्य जताया है। उनका कहना है कि जब तक अमर सिंह पार्टी से जुड़े रहे ऐसा संकट कभी नहीं आया। अब तक सपा मुख्यमंत्री मायावती द्वारा प्रत्याशियों से पैसे लेने का विरोध करती रही है, लेकिन अब खुद उसी लाइन पर चल पड़ी है। पार्टी ने एक फार्म भी छपवाया है जिसमें इच्छुक आवेदकों को अपना पूरा ब्यौरा देना होगा, राजनीति में बिताए वर्ष और पार्टी के लिए किए गए कामों की भी जानकारी देनी होगी। "

बिग बी पर अब देशमुख की सुर्खियां


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खरगौन (मध्य प्रदेश) में अमिताभ बच्चन पर मुंह खोल कर महाराष्ट्र के सांसद और केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख ने फिर सुर्खियां ताजा कर दी हैं। देशमुख ने कहा है कि अमिताभ गुजरात का एंबेसेडर पद ठुकरा दें तो कांग्रेस को उनसे कोई परहेज नहीं। कांग्रेस को अमिताभ से कोई परेशानी नहीं है। न तो कांग्रेस हाईकमान ने, न तो पार्टी ने कभी उनका विरोध किया है। गुजरात में हुए गोधरा कांड के कारण कांग्रेस कार्यकर्ता वहां की भाजपा सरकार से नाराज हैं और हमें कार्यकर्ताओं की भावनाओं की कद्र करनी है। जिस भी दिन श्री बच्चन गुजरात का एंबेसेडर पद छोड़ देंगे, उसी दिन से हम उनके साथ नजर आएंगे। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व जब अमिताभ खूब मीडिया की सुर्खियों में छाए रहे, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने सोनिया गांधी पर हमला बोलते हुए कहा था कि कांग्रेस में सोनिया के खिलाफ बोलने की किसी की भी हिम्मत नहीं है, अमिताभ को खलनायक के तौर पर पेश किया जा रहा है। भाजपा शुरु से ही अमिताभ के समर्थन में है। उसी दौरान पहले दिल्ली में जया बच्चन पर टिप्पणी करने के बाद सांसद अमर सिंह ने अमिताभ की दोस्ती का पाठ पढ़ाया था। उससे पहले महाराष्ट्र में तो कई दिनों तक घमासान मचा ही रहा। अब देशमुख के मुंह खोलने के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। एक अटकल ये भी उछाली गई है कि महाराष्ट्र की राजनीति से बिछुड़-से गए देशमुख ने अमिताभ पर इतनी देर से मुंह ऐसे ही नहीं खोला है।

रामदेव को लालू बोले- बाबा तो 'बौरा' गए!


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क्या योगगुरू बाबा रामदेव सचमुच 'बौरा' गए हैं। आरजेडी प्रमुख एवं सारन के सांसद लालू प्रसाद यादव तो उनके बारे में ऐसा ही कहते हैं। मुख्यमंत्री मायावती कह ही चुकी हैं कि गांव के लोगों को कसरत के लिये किसी बाबा की जरूरत नहीं। भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी कहते हैं कि बाबा नई पार्टी न बनाएं। उलेमा कहते हैं कि मुसलिम उनके शिविर में न जाएं। फिलहाल लालू का ताजा बयान ऐसे समय में आया है, जबकि तीन वर्ष के भीतर एक नया राजनीतिक दल खड़ा करने की घोषणा करने वाले योगगुरू नेपाल में भी एक योग केंद्र शुरू कर चुके हैं। उन्हें वहां के राष्ट्रपति रामबरन यादव का समर्थन प्राप्त है। लालू यादव कहते हैं कि ‘यह ठीक नहीं है कि रामदेव अपने को सही साबित करने के लिए प्रत्येक नेता की आलोचना करें। हकीकत यह है कि रामदेव बौरा गए हैं। हमने योग गुरु से कहा था कि वे कोई राजनीतिक दल खड़ा नहीं करें।’लालू रामदेव के कैंसर को ठीक करने संबंधी दावे की भी आलोचना करते हुए कहते हैं कि ‘रिसर्च के इस युग में ऐसा करना न केवल धोखाधड़ी बल्कि लोगों को बेवकूफ बनाना है।’ सियासत की इस साधु-साधु सरगर्मी में आइए एक बार फिर जान लेते हैं कि मायावती ने क्या कहा था और जवाब में बाबा क्या बोले थे। मुख्यमंत्री मायावती कहती हैं कि ‘एक बाबा है, कसरत सिखाता है और देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के नाम पर राजनीतिक पार्टी बनाकर देश पर राज्य करना चाहता है। भारत की 80 प्रतिशत जनता गांवों में रहती है और सुबह से शाम तक काम करने से उनकी कसरत अपने आप हो जाती है। गांव के लोगों को कसरत के लिये किसी बाबा की जरूरत नहीं है। बाबा शहर के लोगों को ही अपने जाल में फंसा सकता है। इस रामदेव मुख्यमंत्री को ‘मायावी’ बताते हुए कहते हैं कि बसपा प्रमुख उनसे इसलिए नाराज हैं क्योंकि वे और उनके अनुयायी गरीबों और दलितों का जीवन बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। समय ही बताएगा कि दोनों में असली मायावी कौन है, जिस दिन मायावती सत्ता से हट जाएँगी वह स्वयं यह महसूस करेंगी कि सत्ता कितनी दिखावटी होती है। उल्लेखनीय है कि योग गुरू ने हाल ही में राजनीति के मैदान में उतरने की घोषणा की है। उनकी पार्टी देश के राजनीतिक तंत्र को साफ़ करने के लिए अगले लोकसभा चुनाव में भारत स्वाभिमान के बैनर तले सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। इसके लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू कर दिया गया है। उनके संगठन ने अगले दो वर्षो में देश के प्रत्येक जिले में सात से 10 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है। बाबा का ये ऐलान सुर्खियां बनते ही भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने बाबा रामदेव से नई पार्टी न बनाने की गुजारिश कर डाली थी। उन्होंने कहा था कि हम बाबा रामदेव से निवेदन करते हैं कि वह नई पार्टी न बनाएं। इससे बीजेपी के वोट कटेंगे और फायदा कांग्रेस को होगा। बाबा रामदेव की राजनीति से जो उम्मीदें हैं, उन्हें हम पूरा करेंगे, वह बीजेपी की मदद करें। इसके जवाब में बाबा ने कहा था कि मैं किसी विवाद को जन्म नहीं देना चाहता। मेरा मकसद सत्ता हासिल करना नहीं है। मैं बस यही चाहता हूं कि राजनीतिक सिस्टम में स्वच्छता आए। अच्छे लोग सभी पार्टियों में हैं, कांग्रेस में भी और बीजेपी में भी। यह भी जान लीजिए कि पिछले साल जब देवबंद (उ.प्र.) में मुस्लिम उलेमाओं की बैठक में योग गुरु बाबा रामदेव ने प्राणायम करके दिखाया था. और तो और एक हिंदू पुजारी ने इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार भी किया था तो चार दिन बाद दारूल उलूम ने फ़तवा जारी कर मुसलमानों से कहा था कि वे बाबा के शिविर में जाने से बचें, क्योंकि शिविर वंदे मातरम के गायन से शुरू होता है। बहरहाल, रामदेव चाहे जो कहें-सुनें, हकीकत तो ये ही लगती है कि उनके राजनीतिक दल खड़ा करने की घोषणा को लेकर कोई खास उत्साह नहीं है। देश में पहले भी कई बाबाओं ने इस तरह के प्रयास किए थे, जिसका हश्र लोगों को पता है। इसलिए लालू यादव की टिप्पणी शायद सच के ज्यादा करीब लगती है।

शिक्षा अधिकार कानून पर भाजपा ने टोका



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अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून लागू हो जाने के साथ ही कांग्रेस और भाजपा के जवाब सवाल भी मुखर होने लगे हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहते हैं कि हमारी सरकार राज्य सरकारों की भागीदारी के साथ यह सुनिश्चित करेगी कि इस कानून को लागू करने में आर्थिक बाधा न आए। वही भाजपा प्रवक्ता एवं सांसद रविशंकर कहते हैं कि इसके लिए पैसा आएगा कहां से? कानून का स्वागत करते हुए उन्होंने इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यों को दी जाने वाली धनराशि में बढ़ोत्तरी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि छह से 14 साल के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए एक लाख 71 हज़ार करोड़ रूपए का खर्च आएगा, लेकिन वित्त आयोग ने राज्यों को केवल 25 हजार करोड़ रूपए देने का प्रावधान किया। वित्त आयोग द्वारा 25 हजार करोड दिए जाने के अलावा केन्द्र राज्यों को 15 हजार करोड़ रूपए की अतिरिक्त राशि देगा, लेकिन इसके बावजूद इतने विशाल और महत्वाकांक्षी कार्य को देखते हुए मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा के लिए राज्यों को दी जाने वाली यह राशि बहुत तुच्छ है, जिसे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। इस कानून को सफल बनाना है तो केन्द्र को खर्चे की अच्छी व्यवस्था करनी होगी। परमाणु दायित्व विधेयक के संदर्भ में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा कुछ नरम रूख अपनाने के संकेत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा औपचारिक रूप से कोई प्रस्ताव लाए जाने पर पार्टी अपनी बात रखेगी। उधर, कानून के आज लागू हो जाने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राज्यों से कह रहे हैं कि इस राष्ट्रीय प्रयास में वे पूरी प्रतिबद्धता से शामिल हों जाएं। नए कानून के तहत राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक हो गया है कि इस आयु वर्ग के सभी बच्चों का स्कूल में दाखिला हो। इसे लागू करने से लगभग एक करोड़ ऐसे बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा जो अभी स्कूल नहीं जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री कहते हैं कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सभी बच्चों की, चाहे उनका लिंग और सामाजिक श्रेणी जो भी हो, शिक्षा तक पंहुच बने। हमारी सरकार राज्य सरकारों की भागीदारी के साथ यह सुनिश्चित करेगी कि शिक्षा के अधिकार कानून को लागू करने में वित्त पोषण बाधा नहीं बने। शिक्षा के महत्व को अपने जीवन के अनुभवों से जोड़ते हुए सिंह ने अपने बचपन को याद किया। उन्होंने कहा कि वह साधारण संसाधन वाले परिवार में जन्मे थे और स्कूल जाने के लिए उन्हें लंबी दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती थी। उन्होंनें कहा कि मैं मिट्टी के तेल के दिए की हल्की रोशनी में पढ़ता था। मैं आज जो भी हूं, शिक्षा की वजह से हूं।

सांसद गुरुदास बुलाएंगे मजदूर संसद


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आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद गुरुदास दास गुप्ता कहते हैं कि देश भर के सभी मजदूर संगठनों के साझा मंच की ओर से कई बुनियादी सवालों को लेकर शीघ्र ही मजदूर संसद बुलायी जायेगी। इसकी तारीख आगामी सात अप्रैल को होने वाली पार्टी की बैठक में मोकर्रर होनी है। हमारा साझा मंच लगातार बढ़ती महंगाई, छंटनी, श्रम कानूनों के उल्लंघन, सार्वजनिक क्षेत्रों के विनिवेश और सामाजिक सुरक्षा कोष में आवश्यक फंड आदि मुद्दों को लेकर राष्ट्रव्यापी लड़ाई तेज करने वाला है। 30 साल बाद देश के सभी प्रमुख 9 मजदूर संगठनों ने इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस(आइएनटीयूसी) के एन संजीव रेडडी की अध्यक्षता में मिलकर 14 सितम्बर को एक साझा मंच बनाया और इसका मकसद कामगारों और मेहनतकशों के संघर्ष को व्यापक उभार देना है।इसी अभियान को लेकर 5 मार्च को पहले चरण में जेल भरो आंदोलन चलाया गया जिसमें 10 लाख मजदूर शामिल हुए। केन्द्र सरकार बढ़ती महंगाई रोकने के कोई उपाय नहीं कर रही है। इस मंहगाई का एक बड़ा कारण पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम का बेहद लचर होना भी है। बजट में भी किसी तरह की राहत नहीं दी गयी। उन्होंने कहा कि 15 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद सत्र में डीजल और पेट्रौल का दाम करने करने के लिए कट मोशन(टैक्स वापस लेने का संशोधन प्रस्ताव) भी लाया जायेगा। श्री गुप्ता ने बताया कि कोयला खदानों के विनिवेश के खिलाफ कोयला मजदूर 5 मई को और निजीकरण के खिलाफ टेलीकम्युनिकेशन में काम करने वाले मजदूर 20 अप्रैल को हड़ताल पर चले जायेंगे।

संसद के आगामी सत्र की रणनीति बनाने में व्यस्त है सपा


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समाजवादी पार्टी एक तरफ संसद के आगामी सत्र में अपनी धमक पुनः दोहराने की रणनीति बना रही है, दूसरी तरफ पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव जनता के बीच अपनी गतिविधियां तेज करते जा रहे हैं। इसी क्रम में आगामी छह अप्रैल को सहारनपुर (उ.प्र.) में सपा अध्यक्ष एवं मैनपुरी के सांसद मुलायम सिंह यादव सैनी सम्मेलन को संबोधित करने वाले हैं। ये जानकारी सपा नेता साहब सिंह सैनी ने देते हुए कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री यादव के कार्यक्रम को लेकर कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह है। इस सम्मेलन को सफल बनाने के लिये कार्यकर्ताओं द्वारा जनसम्पर्क का अभियान जारी है। उधर, समाजवादी पार्टी ने बजट सत्र के अगले हिस्से में सरकार के साथ दोतरफा व्यवहार करने का मन बनाया है। नाभिकीय क्षतिपूर्ति विधेयक पर वह सरकार के साथ नरमी से पेश आना चाहती है, जबकि उर्वरकों पर सब्सिडी हटाने से बढ़ी कीमतों को लेकर कटौती प्रस्ताव पेश करने जा रही है। विदेशी विश्वविद्यालय विधेयक पर उसका विरोध और महिला आरक्षण विधेयक के मसौदे में संशोधन की उसकी मांग यथावत जारी रहेगी। सपा के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता मोहन सिंह मध्य प्रदेश के पूर्व सांसद बुद्धसेन पटेल के अलावा छोटेलाल यादव, त्रिवेणी प्रसाद मिश्र और चूड़ामणि यादव के कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल होने के मैके पर कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने नाभिकीय क्षतिपूर्ति विधेयक को संसद के चालू सत्र में ही पेश करने की बात कही है। साथ ही उसके पहले उस पर सुझाव मांगे हैं। ऐसे में, पार्टी चाहती है कि विधेयक को पेश करने से पहले उसे संसद की प्रवर समिति को सौंप दिया जाए, जिसमें सभी दलों के सदस्य हों। देश में परमाणु बिजली उत्पादन बढ़ाने के नजरिए से यह विधेयक अहम है, लेकिन उसके मौजूदा स्वरूप में काफी खामियां हैं। मसलन परमाणु ईधन आपूर्ति करने वाले देशों की जवाबदेही तय करने के बजाय उसका उपयोग करने वाले देशों पर यह दायित्व डाल दिया गया है। सारे विरोधों के बावजूद सरकार ने उर्वरकों के मूल्य कम नहीं किए। गुरुवार से यूरिया महंगी हो गई है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए हैं। इसलिए पार्टी संसद में वित्त विधेयक के खिलाफ कटौती प्रस्ताव लाएगी। समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन की अपनी मांग पर कायम है। विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए देश का दरवाजा खोलने की सरकार की कोशिश का भी पार्टी विरोध करने की तैयारी कर चुकी है।

सांसद योगी जिलाधिकारी पर बरसे


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पडरौना में अनुसूचित जाति में शुमार मुसहर समुदाय के लोगों को सरकारी योजनाओं से लाभान्वित कराने की मांग को लेकर पिछले दिनों हिंदू युवा वाहिनी विश्व हिंदू महासंघ के बैनर तले कलेक्र्ट्रेट पर आयोजित धरना प्रदर्शन के दौरान भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को जमकर खरी खोटी सुनाई। उन्होंने गरीबों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए संचालित सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के बोलबाला होने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसके लिए यहां के सरकारी अधिकारी ही जिम्मेदार हैं। साथ ही उन्होंने प्रशासन को खबरदार किया कि यदि अब भी पात्र लोगों तक इन योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो हियुवा व विहिप कार्यकर्ता जिले के सभी विकास खंडों के दफ्तरों पर धरना-प्रदर्शन व रास्ता जाम करेंगे। मुसहर समुदाय के लोगों को अब तक न तो इंदिरा आवास या महामाया आवास योजनाओं के तहत आवास सुलभ कराए गए हैं और न ही अंत्योदय राशन कार्ड। इसकी इकलौती वजह इन योजनाओं के क्रियान्वयन में व्याप्त भ्रष्टाचार है। नेबुआ नौरंगिया व कुबेरस्थान थाना क्षेत्रों में हुई बलात्कार की घटनाओं के अभियुक्तों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का इस्तेमाल न किए जाने पर भी नाराजगी व्यक्त करते हुए सांसद ने जिलाधिकारी एसवीएस रंगाराव का नाम लेकर आरोप लगाया कि जब से वे यहां तैनात हुए हैं, जिले में हिंदू समुदाय के लोगों को ईसाई बनाने यानी धर्मांतरण का सिलसिला शुरू हो गया है। धरने के दौरान काफी देर तक यहां कश्मकश का माहौल रहा। लोगों के दबाव में जिलाधिकारी को मौके पर आकर आठ सूत्री ज्ञापन लेना पड़ा। इससे पहले जिला प्रशासन के हठ से दुखी सांसद योगी को स्वयं लोगों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में घुसने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद सांसद और उनके समर्थक सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। आखिरकार जिलाधिकारी रंगाराव को पुलिस कप्तान लव कुमार के साथ मौके पर पहुंचकर ज्ञापन लेना पड़ा। ज्ञापन में मुसहरों को कृषि भूमि का पट्टा देने, हर मुसहर परिवार को इंदिरा आवास एवं अंत्योदय राशन कार्ड से लैस किए जाने, इस समुदाय की बालिकाओं की शादी के लिए सरकारी मदद, सभी मुसहर बस्तियों में प्राथमिक विद्यालय स्थापित करने तथा हर माह नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर लगाने संबंधी मांगों का उल्लेख किया गया है।
पडरौना जिला मुख्यालय पर मुसहर कल्याण समिति के धरने को संबोधित करते हुए सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकतंत्र का मतलब शासन होता है और जनता की शासन में जमता को कई उसे बनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं कर सकता। इसके बावजूद कुशीनगर जनपद में 20 हजार मुसहर जातियां शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित है। हिंदू युवा वाहिनी और विश्व हिंदू मासंघ इस दलित लोगों के कल्याण के लिए एक अभियान चलाया है और इसी क्रम में कुशीनगर के भ्रष्ट जिला प्रशासन को धरने के माध्यम से चेतावनी दी जा रही है। इस जनपद में लोक बेहाल है तथा तंत्र बेलगाम हो चुका है। इसी कारण यहां गरीबों को शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मैंने पांच वर्ष पहले इस जनपद के नब्बे प्रतिशत मुसहर बस्तियों का दौरा किया था और उसके बाद भारत सरकार को यहां की मुसहर जाति की दुर्दशा से लिखित तौर पर अवगत कराया था। मेरे उन्हीं प्रयासों के चलते जिले में 46 हजार इंदिरा आवास मिले हैं, लेकिन इस इंदिरा आवास में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती जा रही है और जिला प्रसासन के द्वारा पांच हजार रुपये लकेर अपात्रों को इंदिरा आवास बेचे जा रहे हैं। इससे हिंदू यवा वाहिनी बर्दाश्त नहीं करेगी और गरीबों का हक दिलाने के लिए कहीं भी संघर्ष के लिए तैयार है। सांसद योगी ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की मुखिया दलित की बेटी हैं और उनके राज्य में महादलित मुसहरों की दर्दशा हो रही है लेकिन उनको कोई चिंता नहीं है। इस जनपद में चल रहे राशन की तस्करी, रोजगार गारंटी में अनियमितता, पेंशन योजना, पेयजल योजना में हो रही धांधली पर जिला प्रसासन को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्होंने चेतावनी दी की वह यदि पात्रों को योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचाता है तो इस भ्रष्ट प्रशासन के अधिकारियों को न्यायालय के जरिये जेल भिंजवाया जाएगा। धरने को मानीराम के विधायक विजय बहादुर यादव, रामकोला के विधायक अतुल सिंह, हियुवा जिला प्रभारी गोविंद राव शिशु, चंद्र प्रकाश चमन आदि ने भी संबोधित किया। धरना स्थल पर डीएम को ज्ञापन लेने के लिए मजबूर करने के बाद सांसद योगी आदित्यनाथ ने पडरौना कस्बे में नगर पालिका परिषद द्वारा निर्मित करीब आधा दर्जन इंटर लॉकिंग सड़कों व नाली का लोकार्प करने के अलावा प्राचीन बुढ़िया माई मंदिर के जीर्णोद्धार संबंधी औपचारिकताएं निभाईं। इस मौके पर बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

सांसद ललन के फिर बागी बोल


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जदयू के सांसद एवं पूर्व बिहार प्रदेश अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ललन का कहना है कि बंद्योपाध्याय कमेटी की रिपोर्ट बिहार में गृह युद्ध की स्थिति उत्पन्न करेगी। जैसे अन्य आयोग की अनुशंसाओं को सरकार ने रद कर दिया है, ठीक उसी तरह बंद्योपाध्याय कमेटी की अनुशंसा को मुख्यमंत्री रद करें। गांव-गांव में इसकी वजह से विद्वेष की स्थिति उत्पन्न हो रही है। जदयू प्रदेश अध्यक्ष के नाते विधानसभा उप चुनाव के समय ही मैंने मुख्यमंत्री को यह कहा था कि बंद्योपाध्याय कमेटी की रिपोर्ट खतरनाक है। वैसे मेरा यह दायित्व है कि सच को जनता के समक्ष में रखूं। अंततोगत्वा जनता को फैसला करना है। ललन सांसद किसान महापंचायत तैयारी समिति की ओर से शंभुशरण श्रीवास्तव के आवास पर दिग्विजय सिंह, पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश सिंह, सांसद, जगदीश शर्मा, पूर्व मंत्री नागमणि, बागी कुमार वर्मा, विधायक किशोर कुमार मुन्ना, बिजेंद्र चौधरी व शंभुशरण श्रीवास्तव के साथ संबोधित कर रहे थे। समिति के तत्वावधान में 2 मई को गांधी मैदान में बंद्योपाध्यय कमेटी की रिपोर्ट के खिलाफ किसान रैली का आयोजन किया जा रहा है। सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि बंद्योपाध्याय कमेटी की अनुशंसा के संबंध में विधान परिषद में मुख्यमंत्री का जो वक्तव्य आया है वह संशय की स्थिति उत्पन्न करता है। बिहार के किसान परेशान हैं। सांसद ललन सिंह ने कहा कि राज्य हित में जो कदम हमें उठाना होगा वह हम उठाएंगे। किसानों के हित में यह जुटान पार्टी लाइन से अलग है। पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह ने कहा कि बिहार में कलियुगी गांधी की सरकार चल रही है। हमारा मुखिया जब तानाशाह हो गया तब हमें जनता के बीच आना पड़ा है। रैली की तैयारी के लिए ललन सिंह को मुंगेर, लखीसराय, भागलपुर, खगड़िया व शेखपुरा का जिम्मेदारी दी गयी है। ललन सिंह कहते हैं कि मेरी सच बात पार्टी के कुछ लोगों को बगावत जैसी लगती है तो वे मुझे बागी समझ लें, लेकिन मैं अपनी बात पर अब अटल हूं।

सांसद को धमकाने की रिपोर्ट


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सांसद सज्जनसिंह वर्मा को धमकी देने के मामले में मध्य प्रदेश पुलिस ने अजमेरा नामक व्यक्ति के विरुद्ध भादंवि की धारा 507 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर लिया है। सीएसपी बलदेवसिंह ठाकुर के अनुसार वर्मा के पत्र के आधार पर कोतवाली पुलिस ने आपराधिक प्रकरण दर्ज किया। वर्मा ने शिवाजीनगर के अग्निकांड प्रभावितों को वहीं बसाने का बयान दिया था। इस बात को लेकर अजमेरा नामक व्यक्ति ने वर्मा को मोबाइल फोन पर धमकी दी थी।

भाजपा को कांग्रेस सांसद-मंत्री का जवाब

राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष पद पर सोनिया गाँधी की नियुक्ति को लेकर भाजपा के बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी का कहना है कि संप्रग अध्यक्ष के प्रयासों से ही नरेगा और आरटीआई अस्तित्व में आया है। मेरा मानना है कि जब सोनिया गाँधी इससे पहले राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष थीं, उस समय नरेगा और आरटीआई कानून आदि के बीज बोए गए थे। जब उनके इस पद को लेकर विवाद पैदा हुआ तब उन्होंने अपनी मर्जी से यह पद छोड़ दिया और चुनाव लड़ीं तथा भारी मत से विजयी हुईं। आज आम लोगों में यह धारणा है कि महिला सशक्तिकरण एवं खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दे इसी मंच से उठाए जाएँ। भाजपा के इस आरोप पर प्रतिक्रिया व्यक्त करती हैं कि सोनिया गाँधी को राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष बना कैबिनेट स्तर का दर्जा देकर एक ऐसा संविधानेतर सत्ता केंद्र बनाया गया है जिससे प्रधानमंत्री का पद निर्थक हो जाएगा।