देखो-देखो काग-भुसंडी!
खुला-खुला बाजार खड़ा है
बेंचो-बेंचो काग-भुसंडी!
अपने मन की आग बेंच दो,
धुले-धुलाए दाग बेंच दो,
गिटपिट राग-विराग बेंच दो,
फूहड़-फिल्मी फाग बेंच दो,
बुझते हुए चिराग बेंच दो
और दुधमुंहे नाग बेंच दो,
अगर बिके तो ब्लॉग बेंच दो....बेंचो-बेंचो काग-भुसंडी!
फर्जी साधु-फकीर बेंच दो,
अपने संगम-तीर बेंच दो,
गंगा-यमुनी नीर बेंच दो,
जान परायी पीर बेंच दो,
बापू की तकरीर बेंच दो,
नेहरू की तस्वीर बेंच दो,
दिल्ली की तकदीर बेंच दो....बेंचो-बेंचो काग-भुसंडी!
तालपचीसी तान बेंच दो,
अपने बहरे कान बेंच दो,
जज हो, तो ईमान बेंच दो,
सैंतालिस की शान बेंच दो
बिके तो संविधान बेंच दो,
राष्ट्र बेंच दो, गान बेंच दो,
सारा हिंदुस्तान बेंच दो, ....बेंचो-बेंचो काग-भुसंडी!
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Sunday, June 15, 2008
Thursday, June 5, 2008
मारो थप्पड़ तान के....
दुश्मन हिंदुस्तान के।
मारो थप्पड़ तान के।
मिलें जो रात-बिरात में,
दिल्ली या गुजरात में,
पाकिस्तानी पांत में,
दाउद की बारात में,
मारो थप्पड़ के तान के.....
घूम रहे हैं देश में,
जोगीजी के भेष में,
कोई मुश का साथी है,
कोई बुश का नाती है,
मारो थप्पड़ तान के......
मीट-चिकन की बोरियां,
नंग-धड़ंग अघोरियां,
शैतानों की छोरियां,
गा रही हैं लोरियां,
मारो थप्पड़ तान के......
महंगाई की नोक पर,
ताल-तबेला ठोंक कर,
पैसा मारे भोंक कर,
चिदंबरम के जोक पर
मारो थप्पड़ तान के......
ओपेक की अठखेलियां,
झम्म झमाझम थैलियां,
साधू बने बहेलिया,
गाने लगे पहेलियां,
मारो थप्पड़ तान के....
मारो थप्पड़ तान के।
मिलें जो रात-बिरात में,
दिल्ली या गुजरात में,
पाकिस्तानी पांत में,
दाउद की बारात में,
मारो थप्पड़ के तान के.....
घूम रहे हैं देश में,
जोगीजी के भेष में,
कोई मुश का साथी है,
कोई बुश का नाती है,
मारो थप्पड़ तान के......
मीट-चिकन की बोरियां,
नंग-धड़ंग अघोरियां,
शैतानों की छोरियां,
गा रही हैं लोरियां,
मारो थप्पड़ तान के......
महंगाई की नोक पर,
ताल-तबेला ठोंक कर,
पैसा मारे भोंक कर,
चिदंबरम के जोक पर
मारो थप्पड़ तान के......
ओपेक की अठखेलियां,
झम्म झमाझम थैलियां,
साधू बने बहेलिया,
गाने लगे पहेलियां,
मारो थप्पड़ तान के....
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