Friday, September 3, 2010

दुनिया को बनाने वाला कोई भगवान नहीं...... स्टीफन हॉकिंग


स्टीफन हॉकिंग


लंदन........ दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में गिने जाने वाले स्टीफन हॉकिंग ने कहा है कि इस दुनिया को बनाने वाला कोई भगवान नहीं है। यह दुनिया भौतिकी के नियमों के मुताबिक अस्तित्व में आई। उनके मुताबिक बिंग बैंग गुरुत्वाकर्षण के नियमों का ही नतीजा था। स्टीफन हॉकिंग ने अपनी नई किताब में ये बातें कही हैं। गौरतलब है कि स्टीफन हॉकिंग ने 1988 में छपी अपनी बहुचर्चित किताब 'ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' में कहा था कि ईश्वर का अस्तित्व अनिवार्य तौर पर विज्ञान का विरोधी नहीं है। दुनिया के बनने में ईश्वर की भूमिका को परोक्ष रूप से स्वीकार करते हुए उन्होंने उस पुस्तक में कहा था, 'अगर हम संपूर्ण थियरी खोज सकें तो वह मानवीय तर्क की सबसे बड़ी जीत होगी। तभी हम ईश्वर का दिमाग समझ पाएंगे।', अपनी नई किताब 'द ग्रैंड डिजाइन' में उन्होंने ईश्वर की किसी भी भूमिका की संभावना खारिज करते हुए कहा कि ब्रह्मांड का निर्माण शून्य से भी हो सकता है। हॉकिंग की इस नई किताब धारावाहिक रूप में लंदन के 'द टाइम्स' में छप रही है। स्टीफन हॉकिंग मौजूदा दौर के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में माने जाते हैं। एक बीमारी से पीड़ित होने की वजह से हॉकिंग खुद चल-फिर या बोल-सुन भी नहीं सकते। फिर भी, अपनी इच्छाशक्ति और संकल्प की बदौलत उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई और रिसर्च जारी रखी बल्कि विज्ञान की सीमाओं को भी विस्तारित किया। इस नई किताब में अपनी पुरानी धारणा से आगे बढ़ते हुए हॉकिंग ने न्यूटन के इस सिद्धांत को गलत बताया है कि बेतरतीब अव्यवस्था से ब्रह्मांड का निर्माण नहीं हो सकता। अपने इस मत की पुष्टि के लिए हॉकिंस ने 1992 में हुई उस खोज का हवाला दिया है, जिसमें हमारे सौरमंडल से बाहर एक तारे के चारों ओर घूमते ग्रह के बारे में पता चला था। हॉकिंग ने इस खोज को ब्रह्मांड की समझ में बदलाव लाने वाला क्रांतिकारी मोड़ बताया है।

Thursday, August 26, 2010

जन्तर मन्तर पर 10 हजार किसान... दिल्ली में यातायात प्रभावित



उत्तर प्रदेश में यमुना एक्सप्रेस के लिए जमीन अधिग्रहण के एवज में ज्यादा मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने गुरुवार सुबह जन्तर मन्तर पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसान सुबह से ही धरनास्थल पर इकट्ठे होने लगे और दोपहर 12 बजे तक भारी संख्या में जुट चुके थे। किसानों का यह आंदोलन राजनीतिक दल राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के जुड़ जाने से और व्यापक हो गया है। किसानों की मांग है कि यमुना एक्सप्रेस वे के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित की जा रही है लेकिन इस एवज में उन्हें समुचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। सभा को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली, रालोद के अध्यक्ष अजित सिंह, बीजू जनता दल के अर्जुन चरण सेठी, तेलुगूदेशम पार्टी के नागेश्वर राव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एबी वर्धन, जनता दल (यू) के शरद यादव, लोकजनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान और अकाली दल के रत्न सिंह अजनाला संबोधित कर रह है। अपनी जमीन के बदले कम मुआवजे का विरोध कर रहे करीब 10 हजार किसान दिल्‍ली में जुटे हैं। आंदोलन को अजित सिंह का पूरा समर्थन है।

राहुल गांधी ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती पर निशाना साधते हुए कहा है कि उन्होंने इस मुद्दे से पीएम मनमोहन सिंह को अवगत करा दिया है। किसानों की भूमि अधिग्रहण का यह मामला बेहद गंभीर है।

दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में किसान रैली के अलावा जगह जगह पानी भरने के चलते यातायात में बाधा पहुंची। दिल्ली यातायात पुलिस के अनुसार आईएसबीटी के निकट हनुमान सेतु को वाहन संचालन के लिए बंद कर देने के चलते वाहनों के रूख को शांतिवन-राजघाट उपमार्ग की ओर मोड़ दिया गया है। किसान रैली के चलते अजमेरी गेट, रामलीला मैदान से रणजीत सिंह फलाईओवर, बाराखंभा रोड, टॉलस्टाय रोड, केजी मार्ग, जनपथ और संसद मार्ग सहित विभिन्न रास्तों पर यातायात प्रभावित हुआ है।


Wednesday, August 25, 2010

सुर्वे रिपोर्ट दैनिकभास्कर... सांसदों के काम की तुलना में ज्‍यादा है वेतन बढ़ोतरी

बुधवार को लोकसभा में सांसदों की वेतन बढ़ोतरी का विधेयक पेश कर दिया गया। इस दौरान कोई हंगामा नहीं हुआ। विधेयक आसानी से पारित हो जाएगा और सांसदों का मूल वेतन 16 हजार रुपये प्रति महीने से बढ़ कर 50 हजार रुपये प्रति महीने हो जाएगा। उनके भत्‍ते में भी 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी हो जाएगी। सांसद तो 80 हजार रुपये मासिक मूल वेतन की मांग पर अड़े थे, पर जनता 300 फीसदी बढ़ोतरी के भी खिलाफ लगती है। dainikbhaskar.com के एक सर्वे में शामिल 64 प्रतिशत पाठकों ने राय दी कि सांसदों के काम के अनुपात में प्रस्तावित वेतन बढ़ोतरी बिलकुल गलत है। सांसदों के वेतन बढ़ोतरी का फैसला होते ही विधायकों ने भी ऐसी ही मांग शुरू कर दी। दिल्‍ली से यह सिलसिला शुरू हो चुका है, जहां विधायकों का वेतन बढ़ाने पर सहमति भी हो गई है। महाराष्ट्र में भी इस संबंध में प्रस्ताव तैयार हो गया है। डर है कि दूसरे राज्‍यों में भी यह मांग जोर पकड़ेगी। और तो और, सर्वे में शामिल 27 फीसदी पाठकों ने तो यह अंदेशा भी जताया कि अब नौकरशाह भी वेतन बढ़ोतरी की मांग कर सकते हैं। छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद नौकरशाहों की तनख्‍वाह पहले से ही मोटी हो गई है। सांसदों का वेतन बढ़ाने का फायदा क्‍या होगा? क्‍या सांसद बेहतर काम करेंगे या फिर इससे भ्रष्‍टाचार में कमी आएगी? सर्वे में शामिल दैनिकभास्कर के पाठकों की राय को संकेत मानें तो ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। केवल 3.4 प्रतिशत लोगों ने माना कि बढ़े हुए वेतन के साथ सांसद बेहतर काम करेंगे और जनता इनसे खुश रहेगी। इसी तरह 5.4 फीसदी पाठकों की राय थी कि सांसदों का वेतन बढ़ जाने से भ्रष्टाचार कम करने में मदद मिलेगी।

Sunday, August 22, 2010












पूर्व विदेश राज्यमंत्री और कांग्रेस सांसद शशि थरूर रविवार सुबह केरल में अपनी दोस्त सुनंदा पुष्कर के साथ विवाह बंधन में बंध गए।
दोनों की शादी थरूर के पुश्तैनी नगर पलक्कड़ में पूरे रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई। थरूर और सुनंदा ने सुबह करीब ८.30 बजे एक दूजे के गले में जयमाल डाली। इससे पहले थरूर ने सुनंदा को मंगल-सूत्र पहनाया।




थरूर-सुनंदा के रिश्तों की बात इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से जुड़े विवाद के दौरान सार्वजनिक हुई थी। इस विवाद की वजह से ही थरूर को मंत्री पद गवांना पड़ा था।

Friday, August 20, 2010

सांसदों का वेतन तीन गुना बढ़ाकर 50,000 रुपए


केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को सांसदों के वेतन मौजूदा 16,000 रुपए प्रतिमाह से तीन गुना बढ़ाकर 50,000 रुपए करने को मंजूरी दे दी लेकिन इसे अपर्याप्त बताते हुए विभिन्न पार्टियों के सांसदों ने हंगामा करके लोकसभा की कार्यवाही में बाधा पैदा की।
समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल (युनाइटेड) तथा अन्य दलों के सांसदों ने कम वेतन वृद्धि का विरोध किया और मंत्रिमंडल द्वारा प्रस्तावित वेतन वृद्धि को वापस लेने की मांग की।
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने विरोध की शुरुआत की। उन्होंने सांसदों को सचिव के वेतन से एक रुपए अधिक 80,001 रुपए प्रतिमाह वेतन देने की मांग की।
सांसद 'हमारा वेतन वापस लो, वापस लो, वापस लो' के नारे लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के आसन के समीप खड़े हो गए। लालू प्रसाद ने आरोप लगाया कि कम वेतन बढ़ाकर सरकार ने सांसदों का अपमान किया है।
मीरा कुमार ने जब लालू प्रसाद से अपनी सीट पर बैठने और प्रश्नकाल को ठीक ढंग से चलने देने को कहा तो प्रसाद ने जवाब दियाकि संसदीय समिति ने वेतन 80,001 रुपए करने की सिफारिश की थी। यह अपमान है। हम इस पर शांत कैसे बैठ सकते हैं।
अध्यक्ष ने बार-बार आग्रह किया कि इस मुद्दे को शून्यकाल के दौरान उठाया जाए लेकिन हंगामा करने वालों ने उसे अनसुना कर दिया। इसके बाद मीरा कुमार ने सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी।
सांसदों का वेतन इस समय 16,000 रुपए प्रतिमाह है। संसदीय समिति ने उनका वेतन 80,001 रुपए प्रतिमाह करने की सिफारिश की थी। इसके विपरीत संसदीय कार्य मंत्रालय ने सांसदों का वेतन 50,000 रुपए प्रतिमाह करने का सुझाव दिया।
संसदीय समिति का कहना था कि सांसदों को सचिव के वेतन से कम से कम एक रुपए अधिक वेतन मिलना चाहिए। वेतन के अलावा सांसदों को संसद या संसदीय कार्यवाहियों में हिस्सा लेने पर हर रोज 1,000 रुपए दैनिक भत्ता मिलता है। सांसदों को प्रतिमाह 20,000 रुपए संसदीय क्षेत्र भत्ता और 20,000 रुपए कार्यालय भत्ता भी मिलता है।

Thursday, August 19, 2010

ममता बनर्जी के बयान पर राज्यसभा में हंगामा


नक्सली नेता चेरुकुरी राजकुमार उर्फ आजाद के एक मुठभेड़ में मारे जाने से जुड़े रेल मंत्री ममता बनर्जी के बयान पर गुरुवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। सदन में शून्य काल के दौरान वाम दलों के सदस्यों ने यह मसला उठाया। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी ने इस मामले पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। येचुरी ने कहा, प्रश्न काल के दौरान प्रधानमंत्री सदन में मौजूद थे और उनसे हमने शून्य काल तक सदन में रुकने के लिए कहा था लेकिन वह चले गए। उन्हें इस समय सदन में मौजूद होना चाहिए थे। प्रधानमंत्री खुद कह चुके हैं कि नक्सली देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। अब उनके मंत्रिमंडल की एक सदस्य नक्सलियों को संरक्षण दे रही हैं। इस पर संसदीय कार्य राज्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, सारी बातें मीडिया में कही जा रही हैं। जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ नहीं है। इसलिए हम मीडिया रिपोर्टो के आधार कोई कदम नहीं उठा सकते। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्होंने ममता को टेलीविजन पर बोलते हुए देखा है। इस पर तृणमूल कांग्रेस के मुकुल रॉय और दिनेश त्रिवेदी ने आपत्ति जताई। बाद में इन दोनों से कहा गया कि वे लोकसभा के सदस्य और मंत्री भी हैं लिहाजा यहां टोकाटाकी नहीं कर सकते। आजाद के संदर्भ में दिए अपने बयान पर बुधवार को ममता ने अडिग रहने की बात कही। बीते नौ अगस्त को लालगढ़ में एक सभा में उन्होंने कहा था कि आजाद की एक सुनियोजित मुठभेड़ में हत्या की गई है।

Wednesday, August 18, 2010

कांग्रेस, बीजेपी और बीएसपी की एक साल की कमाई 8 अरब रुपये

लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस, विपक्षी पार्टी बीजेपी और उत्तर प्रदेश में शासन कर रही बीएसपी की एक साल की कमाई के आगे भारत पर वर्षों राज करने वाली ब्रिटेन की तीन प्रमुख पार्टियां कहीं भी नहीं टिकती हैं। भले ही ब्रिटेन का जीडीपी (सकल घरेलू उत्‍पाद) भारत से दोगुना है, वहां का हर नागरिक औसतन एक भारतीय से 30 गुना ज़्यादा कमाता है, लेकिन भारत की तीन प्रमुख सियासी पार्टियों की आमदनी ब्रिटेन की तीन प्रमुख पार्टियों की तुलना में 150 गुना से भी ज़्यादा है। वित्त वर्ष 2008-09 में कांग्रेस, बीजेपी और बीएसपी की साझा आमदनी करीब 786.62 करोड़ रुपये (करीब 8 अरब रुपये) रही, जबकि ब्रिटेन की तीन प्रमुख राजनीतिक पार्टियों- लेबर, कंजर्वेटिव और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी - ने वित्त वर्ष 2009-10 में महज करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये (पाउंड स्टर्लिंग की आज की दर के आधार पर) जुटाए। भारत के राजनीतिक दलों की माली हैसियत सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत डाली गई एक अर्जी के जरिए सामने आई है, जबकि ब्रिटिश राजनीतिक पार्टियों की कमाई का ठोस अनुमान वहां के चुनाव आयोग ने लगाया है। भारत में 702 राजनीतिक पार्टियां रजिस्टर्ड हैं। इनमें छह पार्टियां राष्ट्रीय हैं। वहीं, ब्रिटेन में 341 राजनीतिक पार्टियां रजिस्टर्ड हैं। ब्रिटेन में चुनाव कराने वाली संस्था 'द इलेक्टोरल कमिशन' की साइट पर मौजूद सूचना के मुताबिक लेबर पार्टी, कंजर्वेटिव पार्टी और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने पिछले साल आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है। लेकिन कमिशन के अंदाज के मुताबिक ये तीनों पार्टियां करीब पौने दो करोड़ रुपये सालाना की आमदनी से ज़्यादा का रिटर्न दाखिल करेंगी। अगर वास्‍तविक आंकड़ा थोड़ा ज़्यादा भी हो, तो भी उनकी आमदनी भारत की तीन सबसे अमीर पार्टियों की सालाना आमदनी के आगे कहीं भी नहीं टिकने वाली होगी है। गौरतलब है कि ब्रिटेन दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि भारत को दुनिया की 11 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है। दोनों देशों में प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी के आंकड़े में बड़ा अंतर है। भारत में लोग बेहद गरीब हैं, लेकिन यहां की राजनीतिक पार्टियों के पास अगाध पैसा है।

Tuesday, August 17, 2010

सांसदों के वेतन और भत्तों में वृद्धि नहीं होने से लालू नाराज


मंगलवार को लोकसभा में लालू यादव और समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह ने शून्यकाल में सांसदों के वेतन और भत्तों का मामला उठाया। सांसद लालू प्रसाद यादव वेतन वृद्धि नहीं होने से खासे नाराज हैं। उन्‍होंने सांसदों की तनख्‍वाह 300 फीसदी बढ़ाने वाले प्रस्‍ताव का विरोध करने वाले कैबिनेट मंत्रियों को आड़े हाथों लिया। बीजेपी के अलावा सभी दलों के सांसदों ने उनका साथ दिया। हंगामे के बाद सदन की कार्रवाई स्थगित करना पड़ी। सोमवार को इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए कैबिनेट की बैठक हुई, लेकिन सभी मंत्री इस पर सहमत नहीं हुए। इसके बाद निर्णय को फिलहाल टाल दिय़ा गया। राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू ने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जो मंत्री इसका विरोध कर रहे हैं वे करोड़पति और अरबपति हैं और आम सांसदों का दर्द नहीं समझते। कैबिनेट के जो सदस्य इस प्रस्तावित बढ़ोतरी से सहमत नहीं हैं, उनमें गृह मंत्री पी चिदंबरम और सुरक्षा मंत्री एके एंटनी, सूचना-प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, प्रवासी मामलों के मंत्री वायलार रवि शामिल हैं, जबकि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल इसके पक्ष में हैं। जिन मंत्रियों ने प्रस्ताव का विरोध किया उनका मानना है कि वेतन बढ़ोतरी के लिए यह सही समय नहीं है। अभी सभी ओर कॉमनवेल्थ खेलों में हुए भ्रष्टाचार की चर्चा है और आम जनता तेल के दामों में बढ़ोतरी से भी खुश नहीं हैं। इसके अलावा महंगाई से भी जनता परेशान है और अभी वेतन बढ़ाने का संदेश अच्छा नहीं जाएगा। प्रस्‍तावित वेतन वृद्धि से सरकारी खजाने पर 142 करोड़ रुपए का अतिरिक्‍त बोझ पड़ेगा। सांसदों को 16,000 रुपए मूल मासिक वेतन मिलता है। इसे 50,000 रुपए करना प्रस्तावित है। सांसदों को इसके अलावा संसद के सत्र के दौरान हर दिन 1,000 रुपए का विशेष भत्ता मिलता है। इसके अलावा उन्हें 20,000 रुपए संसदीय क्षेत्र भत्ता के रूप में भी दिए जाते हैं। दिल्‍ली में निवास, हवाई व रेल यात्रा, बिजली, फोन आदि की सुविधा भी दी जाती है।वित्त मंत्री ने कहा प्रस्ताव विचाराधीनवित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने राज्यसभा में बताया कि सरकार को सांसदों का वेतन बढ़ाने संबंधी समिति की रिपोर्ट मिल गई है। इस पर विचार के बाद इसे पंद्रहवीं लोकसभा के गठन के दिन से लागू किया जाएगा।

Friday, August 13, 2010

हिन्दी में पूछे गये सवाल का जवाब अंग्रेजी में दिये जाने का विरोध

लोकसभा में आज प्रश्नकाल की कार्यवाही का अंग्रेजी अनुवाद उपलब्ध नहीं होने के कारण सदन को 15 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। प्रश्नकाल के दौरान जब भारतीय जनता पार्टी के हंसराज अहीर ने विद्युतिकरण के मुद्दे को लेकर जब सवाल पूछा तो द्रमुक के टी आर बालू ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से अंग्रेजी अनुवाद नहीं होने की शिकायत करते हुये कहा कि अक्सर प्रश्नकाल के दौरान अंग्रेजी अनुवाद सुनने की सुविधा नहीं होती है और ऐसे में हमारे यहां रहने का क्या मतलब है।लोकसभा अध्यक्ष ने इस बारे में व्यवस्था किये जाने का आश्वासन दिया, लेकिन श्री टी आर बालू एवं द्रमुक के सदस्य सदन से उठकर जाने लगे। इस पर सदन में सवालों का जवाब दे रहे विद्युत राज्य मंत्नी भरत सिंह सोलंकी ने कहा कि वह अंग्रेजी में जवाब दे रहे हैं, इस पर श्री बालू एवं अन्य सदस्य लौट आये, लेकिन भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष के ज्यादातर सदस्य अपनी सीटों पर खड़े होकर हिन्दी में पूछे गये सवाल का जवाब अंग्रेजी में दिये जाने का विरोध करने लगे।इस पर श्री सोलंकी ने कहा कि वह सवाल का जबाव पहले हिन्दी में और बाद में अंग्रेजी में देंगे। इस पर सदन में शोर शराब जारी रहा और अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही साढ़े ग्यारह बजे से पौने बारह बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

Sunday, August 1, 2010

सांसद प्रभुनाथ लालू प्रसाद के साथ


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जदयू नेता पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह, जदयू विधायक केदार सिंह व रामप्रवेश राय समर्थकों के साथ 7 अगस्त को राजद में शामिल होंगे। छपरा में आयोजित इस मिलन समारोह में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद शिरकत करेंगे।
प्रभुनाथ सिंह का सारण प्रमंडल में एक जाति विशेष पर अधिक प्रभाव है। उनका राजद सांसद उमाशंकर सिंह के साथ मतभेद रहा है, जिनके हाथों उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था। राजद सुप्रीमो ने उमाशंकर सिंह की सहमति से ही प्रभुनाथ सिंह को राजद में शामिल करने का निर्णय किया है।
दूसरी ओर बिहार में शुरू सियासी तोड़भांग के खेल पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को कहा है कि लालू जदयू से रिजेक्ट माल ले जा रहे हैं। जो भूतपूर्व हो चुके हैं उनके जाने का कोई मतलब नहीं। हम वहां से वर्तमान को लाएंगे।
नीतीश कुमार ने कहा कि लालू प्रसाद का हाल बुरा है। जब भी वह कोई बात करते हैं जनता हंसती है। उनके कुशासन का दंश झेल रहे लोगों ने पहली बार सुशासन का स्वाद चखा है। जब राजद सुप्रीमो फिर से वापसी की बात करते हैं तो लोग सिहर उठते हैं। रोंगटे खड़े हो जाते हैं लोगों के।

Saturday, June 5, 2010

आपसी खींचतान से गडकरी दुखी


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भाजपा में आंतरिक कलह का परोक्ष जिक्र करते हुए पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने आज कहा कि कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच टकराव होने से उन्हें काफी दुख होता है।भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के दो दिवसीय सम्मलेन में गडकरी ने कहा, ‘‘ जब मैं देखता हूं कि दो बड़े व्यक्तियों के अंह टकरा रहे हैं तब मुझे बहुत दुख होता है। मैं उनके बीच मध्यस्थता का प्रयास करता हूं।’’ उल्लेखनीय है कि गडकरी को पिछले साल दिसंबर में उस समय भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था जब पार्टी में अंतर्कलह चरम पर था।उन्होंने कहा, ‘‘ हम सब को अपने मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों की अगुवाई में टीम भावना के साथ काम करना चाहिए। ’’ गडकरी ने कहा कि राष्ट्रवाद भाजपा का प्रेरणास्रोत है और यह पार्टी के राजनीतिक चरित्र को परिभाषित करता है।उन्होंने कहा कि पार्टी का मार्गदर्शन करने वाले महत्वपूर्ण व्यक्ति यहां पधारे हैं। सम्मेलन में भाजपा शासित राज्यों के 65 मंत्री और राज्य मंत्री उपस्थित थे। उनके अलावा करीब दो दर्जन पार्टी पदाधिकारी भी मौजूद थे।उन्होंने कहा, ‘‘हमने जिन सभी क्षेत्रों में काम किया, हमने साबित किया है कि हमारी पार्टी अन्य से भिन्न है और हमें इस बात पर गर्व है।’’

आज विश्व पर्यावरण दिवस है





























Thursday, June 3, 2010

अध्यक्ष के रूप में मीरा का एक साल


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लोकसभा अध्यक्ष के रूप में एक वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर मीरा कुमार ने आज कहा कि वह प्रश्नकाल का समय बदलने सहित सभी मुद्दों पर आम राय से चलना पसंद करेंगी ।लोकसभा की पहली महिला अध्यक्ष बन कर इतिहास रचने वाली मीरा कुमार ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘मेरा प्रयास यह सुनिश्चित करना होगा कि सदन में आपसी सम्मान की भावना बने ।’’ वह पिछले साल तीन जून को सर्वसम्मति से लोकसभा अध्यक्ष चुनी गई थीं ।प्रश्नकाल के अक्सर हंगामे की भेंट चढ़ जाने के कारण उसके समय में परिवर्तन करने की उनकी मंशा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘मेरे काम काज का ढंग यह है कि मैं उस समय तक कोई निर्णय लागू नहीं करती हूं, जब तक कि उस पर आम राय नहीं बन जाती ।’’ अध्यक्ष के रूप में उन्होंने एक बड़ा पर्वितन यह किया है कि अब कोई तारांकित प्रश्न सिर्फ इसलिए समाप्त नहीं हो जाता है कि उसे पूछने वाला सदस्य सदन में उपस्थित नहीं है । यह महत्वपूर्ण फैसला उन्होंने उस समय किया जब एक दिन असामान्य रूप से 17 सवालों के जवाब मंत्री इसलिए नहीं दे पाए कि प्रश्नकर्ता सदस्य सदन में उपस्थित नहीं थे ।उन्होंेने ऐतिहासिक व्यवस्था में अध्यक्ष को यह अधिकार दिया कि प्रश्नकर्ता सदस्य के सदन में मौजूद नहीं रहने पर भी वह मंत्री से उसका उत्तर देने को कह सकता है और मंत्री के उत्तर के बाद अन्य सदस्य उस पर पूरक प्रश्न कर सकते हैं ।एक साल के कार्यकाल के अनुभवों के बारे में पूछे जाने पर मीरा कुमार ने कहा, ‘‘पिछला एक साल चुनौती भरा होने के साथ ही बहुत संतोषजनक भी रहा क्योंकि सदन में सभी सदस्यों ने उनके प्रति सम्मान प्रकट किया ।’’

Wednesday, June 2, 2010

पश्चिम बंगाल में प्रणब मुखर्जी ने अपनी हार स्वीकार की




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पश्चिम बंगाल में हुए निकाय चुनावों की वोटों की गिनती चल रही है। निकाय


चुनाव व कोलकता वार्ड चुनाव के रुझान में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस बहुमत की तरफ आगे बढ़ रही है। ममता की भारी जीत को देखते हुए उन्होंने कहा कि जनता का फैसला मुझे स्वीकार है, साथ ही मैं ममता को ढेर सारी बधाई भी देना चाहता हूं कि जनता के दिल में जगह बनाने में कामयाब रहीं। रानीगंज, तुफानगंज सीट पर भी लेफ्ट, कटवा सीट पर कांग्रेस का कब्जा, पुरुलिया व रघुनाथपुर में तृणमूल की जीत, सोनामुखी और चन्द्रकोणा, दिनहाटा में लेफ्ट की जीत, जलपाईगुड़ी में कांग्रेस की जीत, माथाभांगी, बाली, दिनहाटा में लेफ्ट, बिसनुपुर, राणाघाट, सॉल्ट लेक, गएशरनगर, बांकरा में टीएमसी की जीत। झालदा, कूचबिहार की चारों सीटों पर लेफ्ट कब्जा। तृणमूल कांग्रेस कोलकाता में भारी बढ़त बनाए हुए है। अब के रुझानों के मुताबिक कोलकाता के 141 वार्डों में 97 वार्डों पर तृणमूल कांग्रेस आगे चल रही है, जबिक लेफ्ट को 33 सीटों पर बढ़त हासिल है। कांग्रेस यहां पर 7 वार्डों में आगे चल रही है। निकाय चुनाव में कांग्रेस और तृणमूल के बीच गठबंधन नहीं हो पाया था और दोनों पार्टियों ने अपने दम पर निकाय चुनावों में हिस्सा लिया था। ताजा रुझानों के मुताबिक बंगाल 81 निकाय सीटों में तृणमूल 31, लेफ्ट 23 और कांग्रेस 9 सीटों पर आगे चल रही है। कोलकाता से सटे विधाननगर (साल्ट) नगरपालिका में भी तृणमूल कांग्रेस बढ़त बनाए हुए है। वहां के 25 वार्डों में तृणमूल 18 वार्डों में आगे है लेफ्ट सिर्फ 7 सीटों पर आगे चल रही है। गौरतलब है कि अभी इन दोनों जगहों पर लेफ्ट का कब्जा है। कांग्रेस ने कातवा (बर्दवान) नगरपालिका सीट पर कब्जा बरकरार रखा है जबकि तृणमूल ने पुरुलिया सीट पर कब्जा जमा लिया है। पश्चिम बंगाल में पिछले रविवार को हुए निकाय चुनावों में तकरीबन 70 फीसदी लोगों ने वोटिंग की थी। इस चुनाव को अगले साल होनेवाले विधान सभा चुनावों के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है।

Tuesday, June 1, 2010

मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त


संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा की 55 सीटों के लिए विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने कैंडिडेटों की घोषणा कर चुके हैं। जिन मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया है उनमें वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा, पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी शामिल हैं। इसके अलावा आर. के. धवन, बी. के. हरिप्रसाद, मोहसिना किदवई, वेंकैया नायडू, मुख्तार अब्बास नकवी और राजीव प्रताप रूडी भी हैं। चुनाव आगामी 17 जून को होना है और नामांकन की प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई है। राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों की संख्या के मुताबिक ही राज्य के राज्यसभा सदस्यों की संख्या तय होती है। यानी बड़े राज्यों से ज्यादा सदस्य आते हैं और छोटों से कम। मिसाल के तौर पर उत्तर प्रदेश से 31 सदस्य चुने जाते हैं, तो अरुणाचल प्रदेश, गोवा और इसी तरह के 9 छोटे राज्यों से सिर्फ एक-एक सदस्य चुनकर आता है। 13 राज्यों में होने हैं चुनाव आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, पंजाब, झारखंड और उत्तराखंड में राज्यसभा चुनाव होने हैं। राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 साल का होता है। एक तिहाई सदस्य हर दो साल बाद रिटायर हो जाते हैं। द्विवार्षिक चुनाव के जरिए नए सदस्य चुने जाते हैं। विधायक ही हैं वोटर विधानसभा के चुने हुए विधायक राज्यसभा सदस्यों के लिए वोट देते हैं। मतदान की प्रक्रिया आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर होती है। राज्यसभा के नेता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह असम से राज्यसभा के सदस्य हैं तो विपक्ष के नेता अरुण जेटली गुजरात से। मगर ऐसी तस्वीर हमेशा से नहीं थी। 8 साल पहले तक राज्यसभा सदस्य बनने के लिए उस राज्य का मूल निवासी होना अनिवार्य था, पर संसद ने कानून बदल दिया। अब यह राज्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। बावजूद इसके यह अभी भी काउंसिल ऑफ स्टेट कहलाती है। कुछ सदस्य होते हैं मनोनीत ऐसा नहीं है कि राज्यसभा के सभी सदस्य निर्वाचन के जरिए ही आते हैं। 12 सदस्यों को राष्ट्रपति विभिन्न क्षेत्रों से मनोनीत करती हैं। मसलन, साहित्य, साइंस और समाज सेवा में उल्लेखनीय काम करने वालों को भी मनोनीत किया जाता है।

Monday, May 31, 2010

राज्य सभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू


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तमिलनाडु में छह राज्य सभा सीटों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया आज शुरू हो गयी। इनके लिए 17 जून को चुनाव होने हैं।विधानसभा के सचिव एम. सेल्वाराज ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘नामांकन पत्र पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न तीन बजे के बीच दाखिल किये जा सकते हैं और नामांकन की अंतिम तारीख दो जून होगी।’’ उन्होंने कहा कि नामांकन पत्र की जांच का काम आठ जून को किया जाएगा और नाम वापसी की अंतिम तारीख 10 जून है।सेल्वाराज ने कहा कि दो निर्दलीय विधायकों ने आज अपने नामांकन पत्र दाखिल किये।

उत्तर प्रदेश विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से राज्यसभा की दस सीटों के लिए 17 जून को दो साल के लिए हो रहे चुनाव और एक सीट के लिए हो रहे उपचुनाव के लिए शुरू हुए नामांकन के पहले दिन यानी सोमवार को बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की जिन दस सीटों के लिए आम चुनाव हो रहे हैं, उनका कार्यकाल चार जुलाई को समाप्त हो रहा है और उनमें से सात पर सपा, दो पर बीएसपी और एक पर बीजेपी का कब्जा है। नकवी ने आज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनय कटियार, प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही, लखनऊ के सांसद लालजी टंडन, पार्टी विधानदल के नेता ओमप्रकाश और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी की उपस्थिति में इन चुनावों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे के समक्ष अपना पर्चा दाखिल किया। जिस एक सीट के लिए उपचुनाव हो रहा है, वह पिछले दिनों एसपी के वरिष्ठ नेता जनेश्वर मिश्र के निधन से खाली पड़ी है। चार जुलाई को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के जिन दस सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें एसपी की जया बच्चन और भगवती सिंह, बीजेपी के अरुण शौरी तथा बसपा के सतीश चन्द मिश्र प्रमुख हैं। प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में 226 सदस्यों वाली सत्तारुढ़ बीएसपी ने दस सामान्य सीटों पर सात और एक उम्मीदवार उपचुनाव की सीट पर उतारने का फैसला किया है जबकि 87 सदस्यों वाली एसपी ने दो उम्मीदवार और 48 सदस्यों वाली बीजेपी ने एक उम्मीदवार खड़ा करने की घोषणा की है। बीएसपी ने इन चुनावों में पार्टी के प्रमुख नेता सतीश चन्द्र मिश्र को फिर से उम्मीदवार बनाने के साथ अंबेद राजन, जुगुल किशोर, सलीम अंसारी, एसपी सिंह बघेल, नरेन्द्र कुमार कश्यप और राजपाल सिंह सैनी को मैदान में उतारने का फैसला किया है, जबकि एसपी की तरफ से मोहन सिंह और रशीद मसूद की उम्मीदवारी घोषित की गयी है।

Sunday, May 30, 2010

बसपा राज में पैसा बना राजनीति का लक्ष्य : अखिलेश यादव


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समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सत्तारुढ बहुजन समाज पार्टी पर लोकतंत्र की परिभाषा ही बदल डालने का आरोप लगाते हुए आज यहां कहा कि बसपा राज में राजनीति की परिभाषा हो गयी है पैसे के लिए सरकार पैसे से चलने वाली सरकार पैसे के माध्यम से सरकार है। मायावती सरकार में हर स्तर पर भ्रष्टाचार व्याप्त होने का आरोप लगाते हुए कहा, मुख्यमंत्री सचिवालय पंचमतल पर भ्रष्टाचार की नीति बनती है और वह भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। उन्होने मुख्यमंत्री मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि लोगो की मूर्तियां उनके मरने के बाद लगायी जाती है मगर मुख्यमंत्री मायावती ने अपने जीवनकाल में ही अपनी सात-सात मूर्तियां लगवाई हैं।बसपा सरकार पर दो हजार एकड़ भूमि पर पार्को एवं स्मारको के निर्माण पर 20 हजार करोड रूपये खर्च कर डालने का आरोप लगाते हुए यादव ने कहा कि यदि यही पैसा गरीबो की दशा सुधारने के लिए खर्च होता तो प्रदेश की तस्वीर बदल सकती थी।अखिलेश ने देश एवं प्रदेश की तमाम समस्याओ के लिए मुख्यत: कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के मिशन 2012 की चुटकी ली और कहा कि देश में महंगाई और भ्रष्टाचार रोक पाने में विफल कांग्रेस और इसके महासचिव राहुल मिशन 2012 का ख्वाब देख रहे है।उन्होने महंगाई के साथ ही बढती बेरोजगारी के लिए भी कांग्रेस एवं केन्द्र सरकार की नीतियो को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि जनता को संप्रग सरकार से उसके काम काज का हिसाब मांगना चाहिए।

Saturday, May 29, 2010

झारखंड में कुछ हाथ नहीं लगा : शत्रु



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भाजपा के वरिष्ठ नेता और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा का मानना है कि ‘‘अवसरवादी गठबंधन’’ के जरिए संख्या का जुगाड़ करके झारखंड में सरकार बनाने के प्रयास से ‘‘दुर्गति’’ के सिवाय पार्टी के कुछ हाथ नहीं आया ।पटना साहब से पार्टी के सांसद सिन्हा ने कहा कि यशवंत सिन्हा जैसे अनुभवी और सम्मानित नेता के नेतृत्व में झारखंड में सरकार बनाने का प्रयास नहीं करके भाजपा ने बड़ी गलती की, जबकि वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने ऐसा करने का सुझाव भी दिया था ।बेबाकी से अपनी बात रखने के लिए ‘शाट गन’ नाम से मशहूर सिन्हा ने प्रेट्र से कहा, ‘‘झारखंड में सरकार बनाने के दुस्साहसिक प्रयास से पार्टी की बदनामी ही हुई । पार्टी को और दुर्गति से बचाने के लिए अब इस तरह के सभी प्रयास तुरंत रोके जाने चाहिए ।’’ उन्होंने कहा कि पार्टी ने अगर इस तरह के प्रयास आगे भी जारी रखे तो इससे ‘दूसरों से अलग’ का दावा करने वाली भाजपा की छवि को गहरा धक्का लगेगा । यही नहीं, इससे इस साल के अंत में होने वाले पड़ोस के बिहार राज्य के विधानसभा चुनाव के नतीजे भी प्रभावित होंगे।

Friday, May 28, 2010

सांसद वाई. एस. जगनमोहन रेड्डी गिरफ्तार


आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्नी वाई एस राजशेखर रेड्डी के पुत्न और कांग्रेस सांसद वाई. एस. जगनमोहन रेड्डी को आज पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वारंगल जिले के महमूदाबाद में शुक्रवार को कडपा के एमपी वा ईएस जगमोहन रेड्डी द्वारा ओदारपू यात्रा शुरू करने के बाद हिंसा भड़क उठी।इस यात्रा के दौरान ही एक छात्र प्रफुल्ल राजू (20) की उस वक्त मौत हो गई जब कांग्रेसी नेता के सुरक्षा गार्ड ने पूर्व मंत्री कोंडा सुरेखा पर हमला करने वाली भीड़ को हटाने के लिए रेलवे स्टेशन के वेटिंग रूम में फायरिंग शुरू कर दी। प्रफुल्ल बहुजन स्टूडेंट फेडरेशन का सदस्य था और वह महमूदाबाद मंडल के वीएस लक्ष्मीपुरम का रहने वाला था। घटना के बाद पुलिस ने जगन को वंगापल्ली स्टेशन पर गिरफ्तार कर उन्हें हैदराबाद ले जाया गया। वारंगल के एसपी शाहनवाज कासिम ने बताया भारी हिंसा को देखते हुए यात्रा टाल दिया गया है। साथ ही शहर में भारी मात्रा में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के आदेश दे दिए हैं।कांग्रेस आलाकमान ने जताया था विरोधकांग्रेस आलाकमान के मना करने और तेलंगाना राष्ट्र समिति तथा तेलंगाना के अन्य कई संगठनों के विरोध के बावजूद आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्नी वाई एस राजशेखर रेड्डी के पुत्न और कांग्रेस सांसद वाई एस जगनमोहन रेड्डी ने आज वारंगल में अपनी 'ओदारपू यात्ना' शुरु कर दी थी।दक्षिण मध्य रेलवे सूत्नों के अनुसार टीआरएस और उस्मानिया छात्न संघ की संयुक्त कार्रवाई कमेटी एवं कई अन्य संगठनों के श्री रेड्डी की इस यात्ना के भारी विरोध के कारण हैदराबाद-वारंगल रेल खंड पर रेल यातायात बाधित हो गया। प्रदर्शनकारियों ने कई जगह पर पटरियों से फिश प्लेटें निकाल दी हैं। इसके अलावा मार्ग पर पेड़ डाले जाने के कारण विभिन्न स्थानों पर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई।सूत्नों ने बताया कि भाग्यनगर-एपी एक्सप्रेस, कृष्णा एक्सप्रेस, सतवहाना और त्निवेन्द्रम एक्सप्रेस सहित कई गाडि़यों को रोक दिया गया है जिसके कारण यात्नियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सूत्नों के अनुसार प्रदर्शनकारियों द्वारा घानपुर, रघुनाथपल्ली और माहबूबाबाद, जंगाव एवं नालगोंडा, वारंगल खंड़ पर पटरियों से फिश प्लेटें हटाई गई जिसके कारण ट्रेनें रोक दी गई। कांग्रेस के पार्टी सूत्नों ने बताया कि यात्ना श्री जगनमोहन रेड्डी ने पार्टी नेताओं की सलाह पर ध्यान नहीं दिया। पार्टी हाई कमान ने भी इस यात्ना की अनुमति नहीं दी थी और इस बारे में पार्टी के आंध्र प्रदेश के प्रभारी केंद्रीय मंत्नी वीरप्पा मोइली श्री रेड्डी को सूचित भी कर दिया था। राज्य के मुख्यमंत्नी के रोसैया ने भी कल रात इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक बुलाई और अपने मंत्नि मंडल के सदस्य एन रघुवीर रेड्डी तथा पी सबिता इंद्रा रेड्डी को श्री जगमोहन रेड्डी के आवास पर भेजकर उन्हें यात्ना नहीं निकालने के लिए सलाह देने को कहा लेकिन श्री रेड्डी यात्ना करने की अपनी जिद्द पर अडे़ रहे।तेलंगाना के राजनीतिक दलों और संगठनों तथा पार्टी हाईकमान के सभी प्रयासों को नजर अंदाज कर श्री जगनमोहन रेड्डी आज सुबह रेल से महबूबाबाद के लिए रवाना हुए थे। इसी बीच यह खबर आई कि श्री जगनमोहन रेड्डी जिस गाड़ी से सफर कर रहे हैं उसमें बम रखा हुआ है तो रेल की पूरी तरह तलाशी लेनी पड़ी इसके साथ ही तेलंगाना से किसी व्यक्ति ने फोन कर कहा कि जिस मार्ग से श्री जगनमोहन रेड्डी जा रहे हैं उस मार्ग पर रेल पटरी की फिश प्लेट हटा दी गई है। इस सूचना के बाद रेल लाइन की पूरी जांच पडताल की गई।श्री जगनमोहन रेड्डी की यात्ना के कारण हैदराबाद वारंगल के बीच रेल यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ है। रेल सूत्नों ने बताया कि इस क्षेत्न से गुजरने वाली करीब 20 एक्सप्रेस टेनों सहित कई रेल गाडि़यों को रोक दिया गया।

Wednesday, May 26, 2010

जया बच्चन फिर समाजवादी पार्टी से राज्यसभा उम्मीदवार


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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अभिनेत्री-राजनेता जया बच्चन को एक बार फिर पार्टी की ओर से राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित किया है। लखनऊ में पार्टी मुख्यालय की तरफ से बुधवार को सपा के उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अखिलेश यादव के हवाले से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में इस बात की जानकारी दी गई। अखिलेश ने कहा कि सपा के संसदीय बोर्ड ने जया के नाम पर आखिरी मुहर लगाई। जया के साथ पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले रशीद मसूद को भी राज्यसभा का टिकट देने की घोषणा की। अमर सिंह को जब सपा से निकाला गया था तब उनके कई करीबियों जयाप्रदा, संजय दत्त, मनोज तिवारी ने सपा से नाता तोड़ लिया था। पिछले दिनों लखनऊ में अमर सिंह ने जया बच्चन के बारे में संवाददाताओं द्वारा पूछा जाने पर कहा था कि इस परिवार से मेरे पारिवारिक रिश्ते हैं और उनके बारे में मैं कुछ नहीं कहूंगा।