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Sunday, August 22, 2010












पूर्व विदेश राज्यमंत्री और कांग्रेस सांसद शशि थरूर रविवार सुबह केरल में अपनी दोस्त सुनंदा पुष्कर के साथ विवाह बंधन में बंध गए।
दोनों की शादी थरूर के पुश्तैनी नगर पलक्कड़ में पूरे रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई। थरूर और सुनंदा ने सुबह करीब ८.30 बजे एक दूजे के गले में जयमाल डाली। इससे पहले थरूर ने सुनंदा को मंगल-सूत्र पहनाया।




थरूर-सुनंदा के रिश्तों की बात इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से जुड़े विवाद के दौरान सार्वजनिक हुई थी। इस विवाद की वजह से ही थरूर को मंत्री पद गवांना पड़ा था।

Wednesday, August 18, 2010

कांग्रेस, बीजेपी और बीएसपी की एक साल की कमाई 8 अरब रुपये

लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस, विपक्षी पार्टी बीजेपी और उत्तर प्रदेश में शासन कर रही बीएसपी की एक साल की कमाई के आगे भारत पर वर्षों राज करने वाली ब्रिटेन की तीन प्रमुख पार्टियां कहीं भी नहीं टिकती हैं। भले ही ब्रिटेन का जीडीपी (सकल घरेलू उत्‍पाद) भारत से दोगुना है, वहां का हर नागरिक औसतन एक भारतीय से 30 गुना ज़्यादा कमाता है, लेकिन भारत की तीन प्रमुख सियासी पार्टियों की आमदनी ब्रिटेन की तीन प्रमुख पार्टियों की तुलना में 150 गुना से भी ज़्यादा है। वित्त वर्ष 2008-09 में कांग्रेस, बीजेपी और बीएसपी की साझा आमदनी करीब 786.62 करोड़ रुपये (करीब 8 अरब रुपये) रही, जबकि ब्रिटेन की तीन प्रमुख राजनीतिक पार्टियों- लेबर, कंजर्वेटिव और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी - ने वित्त वर्ष 2009-10 में महज करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये (पाउंड स्टर्लिंग की आज की दर के आधार पर) जुटाए। भारत के राजनीतिक दलों की माली हैसियत सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत डाली गई एक अर्जी के जरिए सामने आई है, जबकि ब्रिटिश राजनीतिक पार्टियों की कमाई का ठोस अनुमान वहां के चुनाव आयोग ने लगाया है। भारत में 702 राजनीतिक पार्टियां रजिस्टर्ड हैं। इनमें छह पार्टियां राष्ट्रीय हैं। वहीं, ब्रिटेन में 341 राजनीतिक पार्टियां रजिस्टर्ड हैं। ब्रिटेन में चुनाव कराने वाली संस्था 'द इलेक्टोरल कमिशन' की साइट पर मौजूद सूचना के मुताबिक लेबर पार्टी, कंजर्वेटिव पार्टी और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने पिछले साल आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है। लेकिन कमिशन के अंदाज के मुताबिक ये तीनों पार्टियां करीब पौने दो करोड़ रुपये सालाना की आमदनी से ज़्यादा का रिटर्न दाखिल करेंगी। अगर वास्‍तविक आंकड़ा थोड़ा ज़्यादा भी हो, तो भी उनकी आमदनी भारत की तीन सबसे अमीर पार्टियों की सालाना आमदनी के आगे कहीं भी नहीं टिकने वाली होगी है। गौरतलब है कि ब्रिटेन दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि भारत को दुनिया की 11 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है। दोनों देशों में प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी के आंकड़े में बड़ा अंतर है। भारत में लोग बेहद गरीब हैं, लेकिन यहां की राजनीतिक पार्टियों के पास अगाध पैसा है।

Wednesday, January 13, 2010

दो टूकः मीडिया ने लगाई मुलायम के घर आग

आज समाजवादी पार्टी के ठीये पर जो ऊंची लपटें उठ रही हैं, उसमें रामगोपाल यादव और अमर सिंह की जो चित्कारें सुनाई दे रही हैं, वह आग किसी और की नहीं, मीडिया की लगाई हुई है। मीडिया यानी चैनल और अखबार। पहली चिंगारी फेंकने में किंचित पहल अमर सिंह की भी मानी जा सकती है, जो पार्टी की अंदरूनी कलह को उस माध्यम (ब्लॉग) से सरेआम करने लगे, जिसे जो चाहे पढ़ सकता है। अमर सिंह ऐसा करते समय यह अच्छी तरह जानते थे कि ब्लॉग पर लिखी बातें सार्वजनिक होंगी ही। इस भूमिका को घर के भेदी वाली बात भी कही जा सकती है। बल्कि यह भी कहा जा सकता है कि अमर सिंह ने ऐसा जानबूझ कर किया। अपने प्रति रामगोपाल यादव और उनके बंधु-बांधवों के रवैये पर वह शायद मुलायम सिंह से भी निराश और निरुत्तरित हो चुके थे। उन्हें लगा होगा कि अब चुप रहने से उनकी आज तक की सारी राजनीतिक कमाई मिट्टी मिल जाएगी। इसलिए उन्होंने खुल्लमखुल्ला ब्लॉग के सहारे तेजी से अपना पार्टी विरोधी रुख उजागर कर दिया। उधर, रामगोपाल यादव भी अमर सिंह की वजह से पार्टी में नंबर-दो की हैसियत वाली लड़ाई में खुद को कमजोर पाते हुए ऐसे ही मौके की तलाश और प्रतीक्षा में थे। उनके साथ ऐसे कई बड़े नेता गुटबंद थे, जिन्हें अमर सिंह के चलते मुश्किलें हो रही थीं। आजम खां, राज बब्बर जैसे लोग, जो सपा से बाहर भले ही थे, सपा के भीतर जो उनके दोस्त-मित्र बचे रह गए, उनके माध्यम से छिपे तौर पर इस प्रयास में थे ही कि अमर सिंह को पछाड़ दिया जाए। रामगोपाल का मामला उछलने के बाद वे सभी सक्रिय हो चुके थे। इसी मौके को ताड़ते हुए मीडिया ने सपा की कमजोर नब्ज को ऐंठना शूरू किया। मुलायम सिंह, अमर सिंह, रामगोपाल यादव, या सपा के खिलाफ उनके विरोधियों के मुंह में उंगली डाल-डाल कर बातें उगलवाई जाने लगीं।
मसलन, चैनलों के सवालों की बानगी देखिए -
....हां तो आजम खां जी, आप अमर सिंह के बारे में क्या कह रहे थे?......जी, राज बब्बर जी, आगे आपको सपा का भविष्य कैसा दिखता है? .....बेनीप्रसाद जी का मुलायम सिंह के बारे में क्या कहना है, आइए खुद उनके मुंह से सुन लीजिए.....अमित जी (अमिताभ बच्चन) क्या जया बच्चन भी संजय दत्त की तरह अमर सिंह के पक्ष में खड़ी होने जा रही हैं? ......लगता है, जया प्रदा और अनिल अंबानी भी अमर सिंह के साथ होंगे। और भी कई तरह की बकवाद...चासनी...खबरफरोशियां!!
सविस्तार पढ़िए.....
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