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Tuesday, March 2, 2010

अब्दुल कलाम पहले, मायावती अंतिम नंबर पर



......और लालू 99वें नंबर पर


‘रीडर्स डाइजेस्ट’ मैग्जीन की ऑनलाइन सर्वेक्षण रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की सौ चुनिंदा हस्तियों में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती अंतिम पायदान पर हैं, जबकि पीएम सातवें, राहुल गांधी 29वें, सोनिया गांधी 72वें, लालकृष्ण आडवाणी 94वें और लालू प्रसाद यादव 99वें नंबर पर हैं।
-प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह देश के सबसे विश्वसनीय राजनेता लेकिन देश के 100 विशिष्ट लोगों की सूची में 7वें स्थान पर।
-मुख्यमंत्री मायावती 100वें स्थान पर।
-पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव 99वें स्थान पर।
-माकपा महासचिव प्रकाश करात 98वें स्थान पर
-कृषि मंत्री शरद पवार 97वें स्थान पर
-रेलमंत्री ममता बनर्जी 96वें स्थान पर।
-लालकृष्ण आडवाणी 94वें स्थान पर।
-वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी 73वें स्थान पर।
-सोनिया गाँधी 72वें स्थान पर
-गृहमंत्री पी. चिदंबरम 50वें स्थान पर।
-राहुल गाँधी दूसरे पायदान पर घोषित लेकिन 100 लोगों की सूची में 29वें स्थान पर।
बाकी हस्तियों में पूर्व राष्ट्रपति केपीजे अब्दुल कलाम को सबसे अव्वल बताया गया है।

कांग्रेस में बेचैनी बढ़ी, कल सांसदों से मिलेंगे सोनिया और पीएम


(sansadji.com सांसदजी डॉट कॉम से)

लगता
है, कांग्रेस के भीतर पेट्रोल कीमतों को लेकर बेचैनी आकार लेने लगी है। कांग्रेस आला कमान अचानक कल अपने सांसदों के साथ इस मामले पर माथापच्ची करने जा रहा है। इस अप्रत्याशित-सी मीटिंग में इस बात पर गुफ्तगू होनी है कि चार मार्च को सदन में बजट और महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष से कैसे निपटा जाए। विपक्ष ही क्यों, अपने पक्ष के भी दो दल विरोध में मुखर होते जा रहे हैं। इस बैठक में प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह और कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी भी शिरकत करने जा रही हैं। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी कल कांग्रेस सांसदों से ऐन ऐसे मौके पर मुलाकात करने जा रहे हैं, जबकि अगले दिन यानी बुधवार को सदन की महाभारत का अंदेशा सिरहाने आता दिख रहा है। यद्यपि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढोत्तरी को वापस लने से इंकार कर चुके हैं लेकिन फिर भी कोई चिंता है, जो सदन से एक दिन पहले उन्हें सांसदों से मुलाकात के लिए विवश कर रही है। सूचना है कि कांग्रेस संसदीय दल की इस बैठक में सोनिया गांधी इस मुद्दे पर अपना रूख जाहिर कर सकती हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिहं ने पेट्रोल, डीजल की बढ़ी कीमतों को वापस लेने से साफ इनकार करते हुए कहा है कि अर्थव्यवस्था में इस वृद्वि को खपाने की पूरी क्षमता है और इससे महंगाई भी नहीं बढ़ेगी। कीमतों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी से कुछ लोगों पर तो असर पड़ता ही है, लेकिन हमें इस मामले में दीर्घकालिक नजरिया अपनाना चाहिए। लोकलुभावन वित्तीय नीतियां लंबे समय में अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक साबित होंगी। यदि हम सभी तरह की लोकलुभावन वित्तीय नीतियों का अनुसरण करें तब भी हम लोगों को मुद्रास्फीति से नहीं बचा सकते, देर-सबेर इस तरह की नीतियों का असर सामने आएगा और देश में निवेश का माहौल समाप्त हो जाएगा। कांग्रेस की कल हो रही बैठक ने ये साफ कर दिया है कि चार मार्च को संसद के भीतर किस तरह के नजारे होंगे। बजट पेश होने के बाद से ही यूपीए नीत के अपने दल ही जो रंग दिखाने लगे हैं, ममता बनर्जी के तेवर जितने सख्त है, करुणा निधि ने जिस तरह से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी को चिट्ठियां लिखी हैं, लालू-मुलायम व वामगंठबंधन ने जो चेतावनियां दे रखी हैं, उससे तो लगता है कि सदन का माहौल पहले से ज्यादा सरगर्म होगा। मुलायम ने पिछले दिनो बजट सत्र के बहिष्कार के दौरान जो कहा सो कहा ही, होली पर इटावा में भी उन्होंने कांग्रेस सरकार के बारे में कुछ कड़ी टिप्पणियां की हैं। इससे कई तरह के अंदेशे गहराने लगे हैं। उधर, सारे विरोध के बावजूद कल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह स्पष्ट कर चुके हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई बढ़ोत्तरी वापस नहीं ली जाएगी। इस तरह के अंदेशे भी सुर्खियों में हैं कि शायद डीजल की कीमत 1 रुपये वापस ले ली जाए। उधर, कृषिमंत्री शरद पवार वित्तमंत्री के सुर में सुर मिलाए हुए हैं। उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बजट भाषण के दौरान पूरे विपक्ष ने वॉकआउट किया था और इसे ग़रीब विरोधी बजट करार दिया था। चेतावनी दी गई थी कि जब तक इस फ़ैसले को वापस नहीं लिया जाता, तब तक संसद को चलने नहीं दिया जाएगा। विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज का कहना था कि सरकार के इस क़दम से पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें बढ़ेंगी और इससे आम आदमी सीधे तौर पर प्रभावित होगा। रक्षा मंत्री ए के एंटनी कहते हैं कि वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाई है। यद्यपि सरकार ने उनके मंत्रालय के लिए पर्याप्त बजट का आवंटन नहीं किया है। वैसे वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया है कि जितनी अतिरिक्त धन की जरूरत होगी वह प्रदान करेंगे। पिछले साल वेतन आयोग और बकाए की वजह से रक्षा बजट में जबर्दस्त वृद्धि की गई थी। इस साल वित्त मंत्री को काफी कठिन काम करना था। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी कुल मिलाकर सही तरह से निभाई है। रक्षा बजट के संबंध में वित्त मंत्री ने सदन के पटल पर वादा किया है कि अगर हम चाहेंगे तो वह हमें पर्याप्त धन मुहैया कराएंगे। उधर, उत्तर प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ आज बीजेपी ने उत्तर प्रदेश बंद की घोषणा की है। भाजपा तेल की कीमतों में इजाफा के खिलाफ संसद से वाकआउट भी कर चुकी है। बसपा प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने इसे जनता को गुमराह करने वाला कदम बताया है। उन्होंने कहा सभी जानते हैं पूरे देश में महंगाई के लिए केन्द्र सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं न की प्रदेश सरकार। ऐसे में महंगाई पर यूपी में विरोध करने का क्या तुक है, ये तो भाजपा वाले ही जानें। हकीकत में संसद के भीतर के पूरे बजट परिदृश्य पर नजर दौड़ाएं तो साफ-साफ यूपीए के भीतर दरार पड़ती दिख रही है। मुद्दा है बजट। केंद्र सरकार के साथी-संघाती भृकुटियां चढ़ा लिए हैं। बहुत संभव है कि चार को सदन शुरू होते ही एकजुट विपक्ष भारी हंगामा करे। फिलहाल एक ही काट नजर आता है कि सरकार पेट्रोल मूल्यवृद्धि वापस लेने की समयपूर्व घोषणा कर दे। संसद में बजट पेश किए जाने के दिन एक ओर विपक्ष ने वॉकआउट किया, दूसरी तरफ रेलमंत्री ममता बनर्जी तमतमा कर कोलकाता रवाना हो गईं। तमिल संघाती करुणानिधि ने प्रधानमंत्री को करारी पाती भेज दी। भीतर ही भीतर चिंगारी सुलगती जा रही है। भड़की तो कई नए नजारे सामने होंगे। यूपीए के आजू-बाजू कनमना रहे हैं। देश देख चुका है कि बजट पेश होने के दौरान किस तरह लालू, मुलायम, सुषमा स्वराज हाथ-में-हाथ डाले एकजुट विरोध कर रहे थे। सुषमा तो ठीक, लालू-मुलायम यूपीए के समर्थक पार्टी अध्यक्ष हैं। आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद ही कह चुके हैं कि पूरा विपक्ष एकजुट है। सोनिया सरकार तानाशाह की तरह बर्ताव कर रही है। मुलायम सिंह की सुनिए। कहते हैं कि इस मनमानी के खिलाफ विपक्षी पार्टियाँ संयुक्त अभियान चलाएँगी। उन्होंने नारे भी लगाए कि जो सरकार निकम्मी है, वो सरकारी बदलनी है। तो इसके क्या मायने निकाले जाएं? इसलिए ममता के गुस्से को हल्के में नहीं लिया जा सकता। राज्यों से खबरें आ रही हैं कि एमपी के शिवराज सिंह चौहान, गुजरात नरेंद्र मोदी, बिहार के नितीश कुमार, उत्तरांचल के निशंक केंद्र के आम बजट पर तेवर कड़े कर लिए हैं। कोलकाता से माकपा-गठबंधन तो लाल हो ही रहा था, रही-सही कसर ममता पूरी करने की झलक दे चुकी हैं। ममता वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से बेहद खफा हो गई हैं। वजह है मालभाड़े पर सर्विस टैक्स। तृणमूल ने अपनी ही सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट के खिलाफ प्रदर्शन करने का एलान कर दिया है। प्रणब का आम बजट में रेलवे के माल ढुलाई पर सर्विस टैक्स में छूट न देना क्या कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में भारी पड़ सकता है, सवाल गूंजने लगे हैं। माकपा इस वाकये के पल-पल के हालात पर सावधान निगाहें रखे हुए है। उल्लेखनीय है कि बजट पेश होने से पहले विपक्षी ऐसे ही किसी अवसर की टोह में थे, सो लगे हाथ मिलता दिख रहा है। दीदी ने 24 फरवरी को रेल बजट में मालभाड़े में कोई बढ़ोतरी नहीं कर जो लोकप्रियता हासिल की थी, उसमें दादा ने पलीता लगा दिया है। दादा के खेल से रेल बजट की सांसत हो सकती है। यही दीदी की बड़ी चिंता है और तृणमूल की भी। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंधोपाध्याय ने भी अपनी नाराजी साफ तौर पर जता दी है। महंगाई का बोझ पहले से भी भारी-भरकम, ऊपर से 20 हजार करोड़ रुपये के टैक्स-भार और साथ में महंगे पेट्रोल डीजल की मार! ममता, मुलायम, लालू, करुणानिधि, मायावती, यानी कांग्रेस के साथी-संघाती। कोई घर में, कोई घर के बाहर से केंद्र सरकार का तरफदार। उधर न्यूज चैनलों पर नमूदार हो रहे केंद्र सरकार के घरेलू सिपहसालार में पेट्रोलियम कीमतों में वृद्धि पर बाएं-दाएं झांक रहे हैं। लगे हाथ चौंकाने वाले बयान में दे डालते हैं। उनके बयानों से जो निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं, वे भी कम चौंकाने वाले नहीं कि क्या बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार पेट्रोलियम मूल्य-वृद्धि से हाथ खींच सकती है? आगे का यही सबसे बड़ा सवाल है! और इसी से जुड़ा अंदेशा साफ नजर आता है कि बजट पेश करने से पहले जो हंगामा महंगाई को लेकर लोकसभा के भीतर हो रहा था, चार मार्च को सदन शुरू होने के बाद वह विकट रूप धारण कर सकता है। भाजपा की यही मंशा है। भाजपा केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, पार्टी प्रवक्ता सिंघवी आदि के उन बयानों से और तिलमिला रही है कि बजट पेश के दौरान विपक्ष अपनी बात रखने की बजाय क्यों भाग खड़ा हुआ। यह चोट भाजपा ही नहीं, उन सब पर है, जो कल वॉकआउट कर गए थे। चार मार्च को सदन का माहौल क्या रुख अख्तियार करेगा, इस संबंध में अतीत के लोकसभा सत्रों से सहज ही कयास लगाया जा सकता है।

संसद में कांग्रेस के खतरे गिनाएंगे मुलायम

माजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों से काफी नाराज हैं। अपने गृहनगर सैफई (इटावा) तो वह होली मनाने पहुंचे लेकिन पत्रकारों से मुलाकात होते ही कांग्रेस पर बरस पड़े। उन्होंने कहा कि बुधवार को संसद में देश को बताएंगे कि कांग्रेस से कौन-कौन-से खतरे हैं। इतनी भयावह महंगाई के लिए सिर्फ और सिर्फ उसकी नीतियां जिम्मेदार हैं। कांग्रेस की पूंजीपतियों से सांठ-गांठ के नाते जनता का ये हाल हो रहा है।

...........sansadji.com सांसदजी डॉट कॉम से साभार

उन्होंने देश की सारी समस्याओं के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि जब-जब कांग्रेस सत्ता में आती है, देश खतरे में पड़ जाता है और मंहगाई से जनता बेहाल हो जाती है। यहां अपने पैतृक गांव सैफई में यादव ने कहा कि खतरे कौन-कौन से हैं, इसे वे बुधवार को लोकसभा में बहस के दौरान उजागर करेंगे। कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों के चलते मंहगाई इतनी बढ़ गयी है कि 80 प्रतिशत जनता के लिए राष्ट्रीय महत्व का त्यौहार होली का रंग भी फीका पड़ गया, जबकि कांग्रेसियों के लिए रोज होली है। इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि बेतहाशा बढ़ती मंहगाई के बावजूद जनता इसके खिलाफ नहीं खड़ी हुई है।इसके लिए हम लोग भी जिम्मेदार हैं, जो विपक्ष की राजनीति करते हैं। आजादी के बाद इतनी महंगाई कभी नहीं बढ़ी। उन्होंने सरकार पर पूंजीपतियों से सांठगांठ का आरोप लगाया। महंगाई पर नियंत्रण पाने में विफल दोनों केंद्र और उत्तर प्रदेश) सरकारें बदहाली की स्थिति से निपटने के प्रति भी लापरवाह हैं। कांग्रेस चुनौतियों का सामना नहीं कर सकती, क्योंकि उसमें इच्छाशक्ति और साहस का अभाव है। बसपा सरकार का भी गरीबों के दुखदर्द से कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने विद्युत और पेयजल संकट से लेकर बढ़ती महंगाई और कथित रुप से बिगड़ती कानून एवं व्यवस्था के लिए प्रदेश में मायावती सरकार के साथ ही केन्द्र की संप्रग सरकार को समान रुप से जिम्मेदार ठहराया। सपा मुखिया ने आरोप लगाया कि संप्रग सरकार की बहुचर्चित कर्ज माफी योजना का लाभ किसानों को तो मिल ही नही पाया क्योंकि उन्हें साहूकारों के कर्ज से मुक्ति मिली ही नहीं।

संसद में चार मार्च हंगामी होने के पूरे आसार

चार मार्च को संसद के भीतर किस तरह के नजारे होंगे, अभी से पता चलने लगा है। बजट पेश होने के बाद से ही यूपीए नीत के अपने दल ही जो रंग दिखाने लगे हैं, ममता बनर्जी के तेवर जितने सख्त है, करुणा निधि ने जिस तरह से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी को चिट्ठियां लिखी हैं, लालू-मुलायम व वामगंठबंधन ने जो चेतावनियां दे रखी हैं, उससे तो लगता है कि सदन का माहौल पहले से ज्यादा सरगर्म होगा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई बढ़ोत्तरी वापस नहीं ली जाएगी. सारे विरोध के बावजूद पीए ने कह दिया है कि कीमतों में बढ़ोत्तरी वापस नहीं होगी। जबकि इस तरह के अंदेशे भी सुर्खियों में हैं कि शायद डीजल की कीमत 1 रुपये वापस ले ली जाए। उधर, कृषिमंत्री शरद पवार वित्तमंत्री के सुर में सुर मिलाए हुए हैं। उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बजट भाषण के दौरान पूरे विपक्ष ने वॉकआउट किया था और इसे ग़रीब विरोधी बजट करार दिया था। चेतावनी दी गई थी कि जब तक इस फ़ैसले को वापस नहीं लिया जाता, तब तक संसद को चलने नहीं दिया जाएगा। विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज का कहना था कि सरकार के इस क़दम से पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें बढ़ेंगी और इससे आम आदमी सीधे तौर पर प्रभावित होगा।

.........sansadji.com...पूरी खबर सांसदजी डॉट कॉम से.....

अब सुनिए सत्ता की भीतरी तीरंदाजी। रक्षा मंत्री ए के एंटनी कहते हैं कि वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाई है। यद्यपि सरकार ने उनके मंत्रालय के लिए पर्याप्त बजट का आवंटन नहीं किया है। वैसे वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया है कि जितनी अतिरिक्त धन की जरूरत होगी वह प्रदान करेंगे। पिछले साल वेतन आयोग और बकाए की वजह से रक्षा बजट में जबर्दस्त वृद्धि की गई थी। इस साल वित्त मंत्री को काफी कठिन काम करना था। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी कुल मिलाकर सही तरह से निभाई है। रक्षा बजट के संबंध में वित्त मंत्री ने सदन के पटल पर वादा किया है कि अगर हम चाहेंगे तो वह हमें पर्याप्त धन मुहैया कराएंगे। उधर, उत्तर प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ आज बीजेपी ने उत्तर प्रदेश बंद की घोषणा की है। भाजपा तेल की कीमतों में इजाफा के खिलाफ संसद से वाकआउट भी कर चुकी है। बसपा प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने इसे जनता को गुमराह करने वाला कदम बताया है। उन्होंने कहा सभी जानते हैं पूरे देश में महंगाई के लिए केन्द्र सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं न की प्रदेश सरकार। ऐसे में महंगाई पर यूपी में विरोध करने का क्या तुक है, ये तो भाजपा वाले ही जानें। हकीकत में संसद के भीतर के पूरे बजट परिदृश्य पर नजर दौड़ाएं तो साफ-साफ यूपीए के भीतर दरार पड़ती दिख रही है। मुद्दा है बजट। केंद्र सरकार के साथी-संघाती भृकुटियां चढ़ा लिए हैं। बहुत संभव है कि चार को सदन शुरू होते ही एकजुट विपक्ष भारी हंगामा करे। फिलहाल एक ही काट नजर आता है कि सरकार पेट्रोल मूल्यवृद्धि वापस लेने की समयपूर्व घोषणा कर दे।
संसद में बजट पेश किए जाने के दिन एक ओर विपक्ष ने वॉकआउट किया, दूसरी तरफ रेलमंत्री ममता बनर्जी तमतमा कर कोलकाता रवाना हो गईं। तमिल संघाती करुणानिधि ने प्रधानमंत्री को करारी पाती भेज दी। भीतर ही भीतर चिंगारी सुलगती जा रही है। भड़की तो कई नए नजारे सामने होंगे। यूपीए के आजू-बाजू कनमना रहे हैं। देश देख चुका है कि बजट पेश होने के दौरान किस तरह लालू, मुलायम, सुषमा स्वराज हाथ-में-हाथ डाले एकजुट विरोध कर रहे थे। सुषमा तो ठीक, लालू-मुलायम यूपीए के समर्थक पार्टी अध्यक्ष हैं। आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद ही कह चुके हैं कि पूरा विपक्ष एकजुट है। सोनिया सरकार तानाशाह की तरह बर्ताव कर रही है। मुलायम सिंह की सुनिए। कहते हैं कि इस मनमानी के खिलाफ विपक्षी पार्टियाँ संयुक्त अभियान चलाएँगी। उन्होंने नारे भी लगाए कि जो सरकार निकम्मी है, वो सरकारी बदलनी है। तो इसके क्या मायने निकाले जाएं? इसलिए ममता के गुस्से को हल्के में नहीं लिया जा सकता। राज्यों से खबरें आ रही हैं कि एमपी के शिवराज सिंह चौहान, गुजरात नरेंद्र मोदी, बिहार के नितीश कुमार, उत्तरांचल के निशंक केंद्र के आम बजट पर तेवर कड़े कर लिए हैं। कोलकाता से माकपा-गठबंधन तो लाल हो ही रहा था, रही-सही कसर ममता पूरी करने की झलक दे चुकी हैं। ममता वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से बेहद खफा हो गई हैं। वजह है मालभाड़े पर सर्विस टैक्स। तृणमूल ने अपनी ही सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट के खिलाफ प्रदर्शन करने का एलान कर दिया है। प्रणब का आम बजट में रेलवे के माल ढुलाई पर सर्विस टैक्स में छूट न देना क्या कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में भारी पड़ सकता है, सवाल गूंजने लगे हैं। माकपा इस वाकये के पल-पल के हालात पर सावधान निगाहें रखे हुए है। उल्लेखनीय है कि बजट पेश होने से पहले विपक्षी ऐसे ही किसी अवसर की टोह में थे, सो लगे हाथ मिलता दिख रहा है। दीदी ने 24 फरवरी को रेल बजट में मालभाड़े में कोई बढ़ोतरी नहीं कर जो लोकप्रियता हासिल की थी, उसमें दादा ने पलीता लगा दिया है। दादा के खेल से रेल बजट की सांसत हो सकती है। यही दीदी की बड़ी चिंता है और तृणमूल की भी। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंधोपाध्याय ने भी अपनी नाराजी साफ तौर पर जता दी है। महंगाई का बोझ पहले से भी भारी-भरकम, ऊपर से 20 हजार करोड़ रुपये के टैक्स-भार और साथ में महंगे पेट्रोल डीजल की मार! ममता, मुलायम, लालू, करुणानिधि, मायावती, यानी कांग्रेस के साथी-संघाती। कोई घर में, कोई घर के बाहर से केंद्र सरकार का तरफदार। उधर न्यूज चैनलों पर नमूदार हो रहे केंद्र सरकार के घरेलू सिपहसालार में पेट्रोलियम कीमतों में वृद्धि पर बाएं-दाएं झांक रहे हैं। लगे हाथ चौंकाने वाले बयान में दे डालते हैं। उनके बयानों से जो निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं, वे भी कम चौंकाने वाले नहीं कि क्या बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार पेट्रोलियम मूल्य-वृद्धि से हाथ खींच सकती है? आगे का यही सबसे बड़ा सवाल है! और इसी से जुड़ा अंदेशा साफ नजर आता है कि बजट पेश करने से पहले जो हंगामा महंगाई को लेकर लोकसभा के भीतर हो रहा था, चार मार्च को सदन शुरू होने के बाद वह विकट रूप धारण कर सकता है। भाजपा की यही मंशा है। भाजपा केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, पार्टी प्रवक्ता सिंघवी आदि के उन बयानों से और तिलमिला रही है कि बजट पेश के दौरान विपक्ष अपनी बात रखने की बजाय क्यों भाग खड़ा हुआ। यह चोट भाजपा ही नहीं, उन सब पर है, जो कल वॉकआउट कर गए थे। चार मार्च को सदन का माहौल क्या रुख अख्तियार करेगा, इस संबंध में अतीत के लोकसभा सत्रों से सहज ही कयास लगाया जा सकता है।


भाजपा ने ललकाराः 21 अप्रैल को चलो संसद



(सांसदजी डॉट कॉम...sansadji.com से साभार)

महंगाई के मुद्दे पर भाजपा तो यूपीए को बख्शना चाहती है, छोड़ना चाहती है। इसीलिए संसद के भीतर से सुषमा स्वराज आवाज बुलंद किए हैं तो बाहर से हस्ताक्षर अभियान चलाकर आगामी 21 अप्रैल को संसद चलो अभियान की जोरदार तैयारी चल रही है। चेन्नई में ही गत दिनों महंगाई के मुद्दे पर भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू ने कहा कि इस मुद्दे पर यूपीए सरकार गिराने का भाजपा का कोई इरादा नहीं है। भाजपा हस्ताक्षर अभियान चला रही है। 21 अप्रैल को उसका संसद चलो कार्यक्रम है। हम नहीं चाहते हैं कि कुछ ही महीने पुरानी यह सरकार गिर जाए क्योंकि हमारा इरादा ऐसा नहीं है। हम बस इतना चाहते हैं कि कांग्रेस महंगाई के मुद्दे पर लोगों की परेशानियों को समझे। अब ईंधन की कीमतें बढ़ाने से आवश्यक चीजों के दाम और बढ़ जाएंगे। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि उनकी पार्टी ने पेट्रोल कीमतों में वद्धि वापस लेने के लिए द्रमुक और तृणमूल कांग्रेस को कोई विशेष सुझाव दिया है। खाद्यान्नों के आयात और निर्यात में घोटाले का आरोप लगाते हुए उन्होंने उसकी संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग की।

सांसद मेघवाल ने गोशाला को दिए पांच लाख
राजस्थान में हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित अबोहर बाइपास की श्रीगोशाला समिति में प्रोत्साहन घोषणा ड्रा समारोह में सांसद भरतराम मेघवालने गोशाला के लिए सांसद कोटे से पांच लाख रूपए देने की घोषणा की। व्यापार संगठनों की ओर से गोशाला के लिए साढ़े चार लाख रूपए दान में दिए गए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सांसद मेघवाल ने गोशाला निर्माण गायों की देखभाल के कार्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संभाग में यह पहली गोशाला है, जिसमें विशाल भवन के साथ-साथ पशुओं की अच्छी सेवा की जाती है। समिति के कार्यों से प्रसन्न होकर उन्होंने गोशाला के लिए पांच लाख रूपए देने की घोषणा करते हुए कहा कि यह राशि सांसद कोटे की नहीं, बल्कि जनता की देन है। पांच ड्रा में से अल्टो कार गांव नवां के गुरमेज सिंह को निकली। नोखा मण्डी के मनोहर लाल महेश्वरी को मोटर साइकिल, हनुमानगढ़ टाउन के रामगोपाल खदरिया को एलसीडी, जंक्शन के बलदेव राज को फ्रिज तथा कूपन संख्या 6672 पर ओवन निकला। गोशाला विकास के लिए करीब साढ़े सात हजार पुरस्कार टिकटों का वितरण किया गया। एक टिकट ढाई सौ रूपए की थी।

मेनका ने की जयराम के अभियान की खिंचाई
आंवला की सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने चेन्नई में वन्यजीव अधिनियम में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन को अनुचित ठहराते हुए उसे पशुओं के खिलाफ अपराध करार दिया। यहां एक पुस्तक विमोचन समारोह में हिस्सा लेने पहुंचीं मेनका गांधी ने प्रस्तावित संशोधनों की आलोचना की। प्रोजेक्ट टाइगर कमेटी में अपनी सदस्यता के बारे में जानकारी देते हुए मेनका ने कहा कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने देश में बाघों को बचाने के लिए कोई अभियान शुरू नहीं किया है। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के एक भी सुझाव पर विचार किए बिना ही संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। देश में बाघों को बचाने की इच्छा और सही सोच रखने वाले व्यक्तियों को इस अघिनियम का विरोध करने के लिए आगे आना चाहिए। जानवरों के अवैध शिकार पर जुर्माना बढ़ाने जैसे उद्देश्यों के साथ किए जा रहे प्रस्तावित संशोधनों से अधिनियम का अस्तित्व शून्य रह जाएगा। ऎसा करना देश के पशुओं के खिलाफ अपराध होगा। यदि वर्तमान में देश में 1,411 बाघ हैं तो संशोधित अधिनियम के लागू होने के कुछ ही समय बाद उनकी संख्या 200 तक हो जाएगी।

Monday, March 1, 2010

होली पर सांसदों की सारारारा...रारारारा



सोमवार को एक ओर जहां सारा देश होली के रंग में सुबह से सराबोर होने लगा, वही महानुभावों, माननीयों के बारे में रंग-बिरंगी, अटपटी-चटपटी तरह-तरह की सूचनाएं मीडियां कोटरों में गूंजने लगीं। लालू ने मूलायम सिंह को फोन कर होली की शुभकामना देने के साथ ही एक तरानेदार सुझाव भी पेल दिया कि यार काहे अमर सिंह से वैर साधे पड़े हो, कहो तो मैं बात करूं, होली के बहाने गले मिल लो। मुलायम ने भी मन की बात बोल दी कि घर वालों ने नरक कर रखा है वरना अमर जैसा यार कहां। साथ ही उन्होंने लालू को भी ठेल दिया कि फालतू में पासवान को गले में लटकाए डोल रहे हो। कहो तो नीतीश को पटरियाऊं, उनका भी तुमसे मिलने का मन चुभला रहा है। पता चला है को दोनों के बीच लगभग आधा घंटे फोन वार्ता चली। देखिए इस रंग का संसद में कौन सा गुल खिलता है।
बातों-बातों में ये भी गुलाली खबर उड़ आई है कि होली की हवा में सोनिया-मायावती, शरद पवार-राज ठाकरे (बाल ठाकरे नहीं), अमर सिंह-शीला गौतम, ममता बनर्जी-सुषमा स्वराज आदि के बीच भी कुछ कर्री खिचड़ी पकी है। लेकिन सबसे ज्यादा संट करने वाली सूचना मनमोहन सिंह-शरद यादव की मिली है। सुना है कि रघुवंश प्रसाद (जो होली पर दिल्ली में ही हैं) के घर शरद की ये खिचड़ी पकी है। इस चौंकाने वाली मुलाकात के पीछे कुछ मीडिया वालों की मदद से रामगोपाल यादव और मोहन सिंह का दिमाग काम कर रहा है। उनके पास अमर सिंह और मुलायम सिंह, एक तीर से दोनों का निशाना साधने के लिए ये रंगायन रचा गया है। ....तो आइए इस अनोखी तान में होली पर तनिक लप्पू-झन्ना भी हो जाए..........

पूर्वांचल का भंग पी अमर बजाए चंग।
ममता दी की रेल में प्रणब करें हुड़दंग।
प्रणब मुखर्जी सुट्ट क्यों नहीं उड़ाएं रंग।
पड़ीं फिकर में सोनिया मनमोहन के संग।
एलके अडवानी खफा, राजनाथ भी तंग।
दिल्ली आए भागवत, हुए गडकरी दंग।
.............कबीर सारारारा....रारारारा...रारारारा

शुभकामनाएं...................
होली के मौके पर अनेक सांसदों ने sansadji सांसदजी डॉट कॉम के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्र एवं प्रदेश की जनता को रंग-पर्व पर हार्दिक शुभकामना के साथ उनके धन-धान्य संपन्नता की कामना की। शुभकामना संदेश देने वाले सांसद हैं भगवती सिंह, बी.बी.तिवारी, अन्नू टंडन, ओम प्रकाश यादव, अरविंद चौधरी, विनय कुमार पांडेय, डॉ.संजय सिंह, डॉ.संजय जायसवाल, देवजी पटेल, कमलेश वाल्मीकि, यशवीर सिंह, राकेश पांडेय, शैलेंद्र कुमार, अनुराग सिंह ठाकुर, इंद्रजीत सिंह राव, नीरज शेखर, विजय बहादुर सिंह, रतनजीत प्रताप नरायन सिंह, तूफानी सरोज, राजेंद्र अग्रवाल, राजकुमारी रतना सिंह, अरविंद कुमार शर्मा, रामसिंह कासवान, शीशराम ओला, गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, देवराज सिंह पटेल, गणेश सिंह, गोविंद प्रसाद मिश्रा, दिग्विजय सिंह, निखिल कुमार चौधरी, हुकुमदेव नरायन यादव, राधामोहन सिंह, जया बच्चन, अखिलेश दास गुप्ता, अमर सिंह, वीर सिंह, नंदकिशोर यादव, वीरपाल सिंह यादव, अजय सिंह चौटाला, डॉ.रामप्रकाश, ईश्वर सिंह, सरदार तरलोचन सिंह, संतोष बगरोडिया, ललित किशोर चतुर्वेदी, डॉ.ज्ञानप्रकाश पिलानिया, डॉ.प्रभा ठाकुर, प्रभात झा, नारायण सिंह केसरी, रघुनंदन शर्मा, अर्जुन सिंह, श्रीमती माया, थिरुनवुक्करसर, सुश्री ए.अनुसुइया, विक्रम वर्मा,आर.के.धवन, प्रेमचंद गुप्ता, डॉ.महेंद्र प्रसाद, राजनीति प्रसाद, रविशंकर प्रसाद, महेंद्र साहनी, एन.के.सिंह, सीपी ठाकुर, शिवानंद तिवारी आदि। गाजियाबाद शहर में होली मिलन समारोह देर रात तक चले। स्वर्णकार समाज के होली मिलन समारोह में सांसद राजनाथ सिंह, पूर्व सांसद सुरेंद्र प्रकाश गोयल, पूर्व सांसद डा. रमेशचंद्र तोमर, आदि ने शिरकत की। पटना में पीएमसीएच में होली मिलन समारोह में सांसद सूरजभान सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान, पूर्व सांसद अरुण कुमार आदि शामिल हुए। होली महोत्सव पूरे शहर में चलता रहा। पूर्व सांसद एवं लोजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण कुमार के निवास पर होली महोत्सव पूरे धूमधाम से मनाया गया। पूर्व सांसद ने भी होली गीतों पर जमकर ठुमके लगाए।