कहिए मृणाल जी!
अब क्या हैं हाल जी!!
कपटी कानाफूंसी
नटी छीना-झपटी
अब कौन बैठा बैताल
आपकी डाल जी!
शेखरःएक जीवनी
क्या पढ़ी कभी आपने?
शोभना भरतिया को
छुआ नहीं शाप ने,
पाल लिया आंभी,
जयचंद-जंजाल जी!
अब क्या हैं हाल जी!!
घुट-घुट कर कितना जिया
मीडिया का माहुर पिया
तिकड़म न जाना
फिर भी कर दिया रवाना
कई खोज रहे नौकरी को
हुए निढाल जी!
अब क्या हैं हाल जी!!
एक थीं शिवानी
गौरा पंत पहाड़ की,
जहां कभी बाढ़ नहीं आती,
सांप केंचुल छोड़ता
और देवता बन जाता है
अब तो बस लोकसभा
चैनल का आसरा बचा
देते रहिए ताल जी!
अब क्या हैं हाल जी!!
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Sunday, September 13, 2009
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