Tuesday, March 16, 2010

आखिर अपनों ने संसद में करा दी न किरकिरी!



(खबर सांसदजी डॉट कॉम sansadji.com से)

पिछले दिनों संप्रग सुप्रीमो सोनिया गांधी की चिंता अनायासनहीं थी। महिला आरक्षण विधेयक पेश होने से पहले इसीलिएमजबूर होकर उन्हें व्हिप का सहारा लेना पड़ा। कांग्रेस के घरमें यह के नए तरह का डर बड़ा हो रहा है। बार-बार कहने केबावजूद सांसद पार्टी अध्यक्ष को नहीं रहे हैं। सवाल मामूलीनहीं! सदन में बीते दिन अंतिम समय में डर वश ही परमाणुविधेयक वापस लेना पड़ा।
सोनिया कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज सांसदों कीअनपुस्थिति पर चिन्ता व्यक्त करते हुए उनसे संसदीय कार्यवाही को अधिक गंभीरता से लेने को कहा पार्टी सूत्रोंने बताया कि कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया ने सदस्यों के बीच अधिक समन्वय की भी आवश्यकताजताई उनका कहना था कि लोकसभा और राज्यसभा में कोई भी विधेयक पेश होने से पहले सांसदों को उनकीभलीभांति जानकारी दी जाए। सोनिया ने कांग्रेस संसदीय दल के नवगठित कार्यकारिणी समिति की पहली बैठकको संबोधित करते हुए यह बात कही। लोकसभा में कल अंतिम समय में परमाणु दायित्व विधेयक को पेश नहींकरने का सरकार द्वारा फैसला करने के एक दिन बाद सोनिया की यह टिप्पणी आयी है। सरकार ने कुछ मंत्रियोंसहित 35 सांसदों के सदन में उपस्थित नहीं रहने के मददेनजर विधेयक अचानक वापस लेने का फैसला कियाक्योंकि उसे आशंका थी कि यदि विधेयक पेश करने को लेकर मत विभाजन हुआ तो सरकार को परेशानी कासामना करना पड सकता है। ऐसा भी नहीं कि ये कोई पहली बार हो रहा है। ये सिलसिला सालों से चल रहा है।कांग्रेस आला कमान इस पर काबू नहीं कर पा रहा है। बीते दिसंबर में एक दिन लोकसभा में कांग्रेस के मुख्यसचेतक पबन सिंह घाटोवार ने मीडिया से कहा था कि वह पार्टी सांसदों से अनुपस्थिति का कारण जानने के लिएसंपर्क कर रहे हैं। कुछ सांसदों ने कहा है कि उनकी ट्रेन देर से पहुंची, जिसके कारण वे सदन में उपस्थित नहीं होसके। उस समय सोनिया गांधी के एक करीबी सहयोगी ने नाम जाहिर की शर्त पर कहा था कि सोनिया ने इसघटना को गंभीरता से लिया है। पार्टी आलाकमान ने ऐसे सांसदों को चेताया है कि ऐसी गलती दोबारा दोहराईजाए। उस दिन कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि प्रश्नकाल के पतन की घटना दुर्भाग्यपूर्ण औरखेदजनक थी लेकिन पार्टी सांसदों ने अपनी इस हरकत को आमतौर पर हल्के में नहीं लिया है। सांसदों ने ऐसाजानबूझ कर नहीं किया। हमें पता है कि देश हमें देख रहा है। यह घटना दोबारा नहीं दोहराई जाएगी। पार्टी ने इसतरह के मामलों से आगे निपटने के लिए प्रावधान तैयार किए हैं। उस दिन ऐसे सांसदों की सूची में शामिल कांग्रेसीसांसद श्रुति चौधरी कहना था कि यह हमारे लिए एक सबक है। हम भविष्य में इसकी पुनरावृति नहीं करेंगे। उसदिन अनुपस्थित रहने वाले अन्य सांसदों में हर्ष वर्धन, मधु गौड़ यास्खी, एंटो एंटनी, विक्रमभाई अर्जनभाई मादाम, पी.टी.थामस, कोडिक्कु निल सुरेश, झांसी लक्ष्मी और एकनाथ गायकवाड़ आदि कुल सांसद 34 सांसद थे। ......औरकल सोमवार को संसद में अनुपस्थित रहने वाले कांग्रेसी संसदों की संख्या 35 थी। उन्हें नोटिस दिया गया है। हैरतहोती है कि अपने ही सुप्रीमो की बात को जब सांसद इस तरह अनसुना कर रहे हैं, फिर अन्य मौकों पर क्या हालतहोगी, अंदाजा लगाया जा सकता है। आज तक कांग्रेस प्रवक्ता का प्रावधान कहीं अमल में नहीं दिखा है, जो उन्होंनेबीते साल पत्रकारों के सामने दुहराया था।

1 comment:

SUNIL DOGRA जालि‍म said...

शायद यह भी जरुरी है